लीबियाई राजदूत ने गद्दाफ़ी के 'मारे जाने' की घोषणा की

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लीबिया पर 41 साल शासन करने वाले कर्नल मुअम्मर गद्दाफी मारे गए हैं. लंदन में लीबियाई राजदूत ने कर्नल गद्दाफ़ी के मारे जाने की घोषणा की है.

ब्रिटेन के प्रधामत्री डेविड कैमरन ने संवाददाताओं से संक्षिप्त बयान में कहा कि ये दिन गद्दाफ़ी के कारनामों के कारण मारे गए लोगों को याद करने का है.

अंतरिम परिषद के नेताओं के हवाले से समाचार माध्यम गद्दाफ़ी के मारे जाने की काफ़ी समय से बात कर रहे थे और लीबिया टीवी के अनुसार गद्दाफ़ी को गोलियां लगी थी जिससे उनकी मौत हो गई.

समाचार एजेंसी एएफपी ने एक फ़ोटो जारी की है जो कथित रुप से गद्दाफ़ी की बताई जा रही है.

इस तस्वीर में जिस व्यक्ति को दिखाया गया है वो घायल है और ख़ून से लथपथ है. किसी वीडियो कैमरे से ली गई इस तस्वीर में समय 12.23 का दिखाया गया है.

गद्दाफी के बारे में खबरों की जानकारी देने के लिए अंतरिम परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी जल्दी ही प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं.

इस बीच त्रिपोली और सिर्त में जश्न का माहौल बना हुआ है.

बीबीसी से एक प्रत्यक्षदर्शी सैनिक ने कहा कि गद्दाफी़ पर गोलियां चलाई गई हैं.

इससे पहले अंतरिम परिषद के एक सैनिक का कहना है कि गद्दाफ़ी सिर्त में एक गडढे में छिपे हुए थे और उन्होंने गोली नहीं चलाने की भी अपील की.

इस सैनिक ने एक सोने की पिस्तौल भी दिखाई जो उसके अनुसार गद्दाफ़ी की थी.

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Image caption समाचार एजेंसी एएफी ने गद्दाफी की ये तस्वीर जारी की है.

अंतरिम परिषद के एक अधिकारी जल्दी ही इस बारे में प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं.

उधर त्रिपोली में जश्न का माहौल बना हुआ है.

सिर्त पर कब्ज़ा

गद्दाफ़ी की गिरफ़्तारी की ख़बर तब आई जब अंतरिम परिषद ने दावा किया कि गद्दाफ़ी के जन्म-स्थान सिर्त पर उन्होंने क़ब्ज़ा कर लिया है.

कर्नल ग़द्दाफ़ी ने साल 1969 से हाल तक लीबिया में सत्ता में रहे थे.

अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत भी गद्दाफ़ी की ग़िरफ़्तारी के लिए अपना बयान दे चुका है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ अंतरिम सरकार के लड़ाकुओं ने गद्दाफ़ी के गढ़ सिर्त पर पूरी तरह से क़ब्ज़ा कर लिया है.

ख़बरों के मुताबिक़ आख़िरी लड़ाई बृहस्पतिवार की सुबह करीब 90 मिनट तक चली.

सरकारी लड़ाकूओं और गद्दाफ़ी समर्थकों के बीच सिर्त में पिछले कई सप्ताहों से संघर्ष चल रहा था. लेकिन कुछ गद्दाफ़ी समर्थक दक्षिणी पूर्वी शहर बनी वालिद में अब भी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं.

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