इतिहास के पन्नों में 24 अक्तूबर

अगर इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो औपचारिक रूप से आज के दिन ही संयुक्त राष्ट्र संघ का जन्म हुआ था. और सत्ताइस साल सेवा में रहने के बाद सुपरसोनिक विमान कॉन्कोर्ड ने अपनी आख़िरी उड़ान भरी थी.

1945: संयुक्त राष्ट्र संघ का जन्म

Image caption न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र भवन

अमरीका के वाशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ का उदघाटन किया गया.

ये आयोजन अमरीका के विदेश मंत्रालय में आयोजित हुई थी.

इसी साल के 26 जून को सैन फ्रांसिसको में हस्ताक्षर की गई संधि को अनुमोदित कर दिया. संधि पर 50 देशों ने हस्ताक्षर किए थे.

अमरीकी विदेश मंत्री जेम्स बायर्नस ने घोषणा की कि ये संधि "देशों के क़ानून का हिस्सा है."

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण देशों के लिए ये एक एतिहासिक दिन है. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि शांति दस्तावेज़ों पर नहीं आधारित हो सकती बल्कि इसके लिए लोगों के भीतर इच्छाशक्ति होनी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र चार्टर में मानवधिकारों की रक्षा का ज़िक्र है और कहा गया है कि देशों को साथ आकर सामाजिक, आर्थिक, मानवीय और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना करना चाहिए.

'संयुक्त राष्ट्र' शब्द का प्रयोग सबसे पहले अमरीकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूज़वेल्ट ने किया था और इसका ज़िक्र पहली जनवरी 1942 को संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र में किया गया था.

एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संस्था की स्थापना के बारे में बातचीत अगस्त 1944 में की गई. जिसके बाद अंतिम चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए थे.

संयुक्त राष्ट्र के पहले की संस्था, लीग ऑफ़ नेशन्स की स्थापना पहले विश्व युद्ध के बाद की गई थी. लेकिन वो दूसरे विश्व युद्ध को रोक पाने में असफल रहा था.

2003: कॉंन्कोर्ड युग की समाप्ति

Image caption विमान सेवा के अंत पर बहुत सारे लोगों ने अफ़सोस जताया.

सत्ताईस साल सेवा में रहने के बाद सुपरसोनिक विमान कॉन्कोर्ड ने आज के दिन ही अपनी अंतिम उड़ान भरी थी.

ये जहाज़ लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर उड़ता था जहां जमा लोग काफ़ी भावमात्मक हो रहे थे.

इसमें 100 के क़रीब गणमान्य वयक्ति सवार थे. विमान जैसे ही रनवे पर उतरा वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजानी शुरू कर दिया.

वहां दो जहाज़ पहले ही पहुंच गए थे.

हॉलीवुड अदाकारा जोन कालिंस ने इस घड़ी को बहुत 'दुखदायक' बताया.

जोन कालिंस कॉंन्कोर्ड पर 10 बार सवारी कर चुकी थीं और वो इस विमान पर सवार थीं.

ब्रिटिश एयरवेज़ ने सेवा बंद करने का फैसला इसलिए लिया कि वो फ़ायदेमंद नहीं रह गई थी.

पेरिस में पहले हुए विमान के एक हादसे में 113 लोग मारे गए थे. जिसके बाद टिकटों की बिक्री कम हो गई थी.

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