इतिहास के पन्नों में 26 अक्तूबर

इतिहास में 26 अक्तूबर की तारीख़ कई घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण है. इसी दिन इसराइल और जॉर्डन के बीच शांति संधि हुई थी और हंगरी में हुई क्रांति के दौरान लड़ाई अन्य इलाक़ों में फैल गई थी.

1994: इस्राइल और जॉर्डन के बीच शांति संधि

Image caption अमरीकी राष्ट्रपति क्लिंटन शांति समझौते पर दस्तख़त के वक़्त मौजूद थे

26 अक्तूबर को ही 46 साल से जारी युद्ध को समाप्त करते हुए इसराइल और जॉर्डन के बीच शांति संधि हुई थी.

इसराइल के प्रधानमंत्री यित्ज़ाक रेबिन और जॉर्डन के सुल्तान हुसैन ने इसराइल-जॉर्डन सीमा पर स्थित वादी अराबा के रेगिस्तानी इलाक़े में इस शांति समझौते पर दस्तख़त किए थे.

इस ऐतिहासिक मौक़े पर अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी मौजूद थे.

क़रीब पांच हज़ार गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में हुई संधि का विश्वभर के टीवी चैनलों पर प्रसारण किया गया था.

हालांकि इस मौक़े पर फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को नहीं बुलाया गया था.

इस समझौते के साथ जॉर्डन, मिस्र के बाद इसराइल के साथ रिश्ते सुधारने वाला दूसरा अरब मुल्क बन गया था.

मिस्र ने 1979 में इसराइल के साथ शांति स्थापना की थी.

दक्षिणपंथियों को छोड़कर इसराइली नागरिकों ने इस समझौते का स्वागत किया था और देश की संसद नेसेट ने इसे बहुमत से पारित किया था.

हालांकि फ़लस्तीनियों ने जो कि जॉर्डन की आबादी के साठ फ़ीसदी थे, इस समझौते से बेहद नाराज़ हुए थे.

उनका मानना था कि समझौते में उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है.

फ़लस्तीनियों ने संधि के ख़िलाफ़ येरुशलम और पश्चिमी तट के इलाक़ों में आम हड़ताल और प्रदर्शन कर अपना विरोध व्यक्त किया था.

1956: हंगरी की क्रांति के दौरान भीषण हुई लड़ाई

Image caption सोवियत टैंक बुडापेस्ट की सड़कों पर उतर आए थे

26 अक्तूबर 1956 को हंगरी के नए प्रधानमंत्री इमरे नेगी ने प्रदर्शनकारियों और सोवियत सेना के बीच जारी लड़ाई के तीसरे दिन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी.

हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में सबसे भीषण लड़ाई हुई थी जिसमें दो से पांच हज़ार लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया गया था.

प्रधानमंत्री नेगी को पिछले साल उनकी उदारवादी नीतियों की वजह से पद से हटा दिया गया था लेकिन दो दिन पहले ही कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने

प्रदर्शन और विद्रोह को शांत करवाने के लिए उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री बना दिया था.

प्रदर्शनकारी आर्थिक सुधार और सोवियत टैंकों को हटाने की मांग कर रहे थे.

प्रधानमंत्री इमरे नेगी ने इन मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था.

हंगरी में आंदोलन की शुरुआत 23 अक्तूबर को हुई थी जब क़रीब एक लाख छात्रों और कामगारों ने राजधानी की सड़कों पर उतर कर लोकतंत्र के समर्थन में रैली की थी.

पहले पुलिस ने गोलीबारी के ज़रिए भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की थी लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया तब सरकार ने सोवियत टैंकों को सड़कों पर उतारने का आदेश दिया था.

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