'अस्पतालों में मरीज़ों की प्रताड़ना'

 मंगलवार, 25 अक्तूबर, 2011 को 15:22 IST तक के समाचार

मानवाधिकर संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने में प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों को कथित तौर पर दमन का केंद्र बना दिया है.

गुट का कहना है कि प्रदर्शनों में घायल बहुत से लोग अस्पताल में इलाज कराने से डर रहे हैं क्योंकि रिपोर्टें हैं कि सुरक्षाकर्मी वहाँ से लोगों को पकड़ कर ले जाते हैं.

अपनी 30 पन्नों की रिपोर्ट में संगठन का दावा है कि कम से कम चार सरकारी अस्पतालों में घायलों को प्रताड़ित किया गया या दुर्व्यवहार किया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक घायल नागरिक अस्पताल जाने में ख़ुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते. हालांकि सीरियाई अधिकारियों ने सरकार विरोधी लोगों को प्रताड़ित करने से इनकार किया है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले सात महीनों में तीन हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. सीरिया इसके लिए चरमपंथियों और हथियार बंद गुटों को दोषी ठहराता है.

प्रताड़ना के आरोप

"जब भी कोई ऐसा मरीज़ आता है जिसे तुरंत ख़ून की ज़रूरत होती है तो हम उलझन में पड़ जाते हैं. दरअसल बल्ड बैंक रक्षा मंत्रालय के तहत आता है. अगर हम केंद्रीय बल्ड बैंक को आग्रह भेजते हैं तो सुरक्षाकर्मियों को पता चल जाता है. ऐसे में उस मरीज़ के पकड़े जाने और प्रताड़ित जाने का ख़तरा होता है."

एक डॉक्टर का दावा

अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों पर सीरिया में जाकर रिपोर्टिंग करने पर कई पाबंदियाँ हैं और तथ्यों की पुष्टि करना मुश्किल है.

एमनेस्टी के मध्यपूर्व मामलों के शोधकर्ता सीलिना नासिर का कहना है कि सीरियाई प्रशासन ने सुरक्षाकर्मियों को अस्पतालों में खुली छूट दे रखी है.

एक बयान में उन्होंने कहा, “कई मामलों में तो अस्पताल कर्मियों ने भी मरीज़ों को प्रताड़ित किया है”

एमनेस्टी इंटननेशनल ने बताया है कि सितंबर में सुरक्षाकर्मियों ने होम्स के अस्पताल में छापा मारा था, वे कथित तौर पर एक हथियारबंद फ़ील्ड कमांडर की तलाश में थे जो सरकार विरोधी था.

रिपोर्ट के मुताबिक, “जब सुरक्षाकर्मी उस कमांडर को नहीं ढूँढ पाए तो उन्होंने 18 घायल लोगों को पकड़ लिया. एक कर्मचारी ने बताया कि उसने देखा कि एक मरीज़ बेहोश था लेकिन सुरक्षाकर्मी उसका वेंटीलेंटर हटाकर उसे ले गए.”

एक निजी अस्तपाल में काम करने वाले मेडिकल कर्मचारी ने एमनेस्टी को बताया, “जब भी कोई ऐसा मरीज़ आता है जिसे तुरंत ख़ून की ज़रूरत होती है तो हम उलझन में पड़ जाते हैं. दरअसल बल्ड बैंक रक्षा मंत्रालय के तहत आता है. अगर हम केंद्रीय बल्ड बैंक को आग्रह भेजते हैं तो सुरक्षाकर्मियों को पता चल जाता है. ऐसे में उस मरीज़ के पकड़े जाने और प्रताड़ित जाने का ख़तरा होता है.”

कई डॉक्टरों ने अस्पतालों पर हमलों या छापे मारे जाने की शिकायत की है.

राष्ट्रपति असद ने इस्तीफ़ा देने से इनकार किया है और कहा है कि सुधार लागू किए जाएँगे. लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये सुधार लागू नहीं होंगे.

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