कोलकाता के एक अस्पताल में 12 बच्चे मरे

अस्पताल के बाहर प्रदर्शन इमेज कॉपीरइट AP

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक अस्पताल में पिछले दो दिन में 12 बच्चों की मृत्यु हो गई है. बच्चों के माता पिताओं ने इसके लिए अस्पताल के प्रबंधन को ज़िम्मेदार ठहराया है और उस पर लापरवाही का आरोप लगाया है.

पहले भी इस साल जून में 25 बच्चों की मृत्यु हो गई थी.

शहर के बीसी रॉय अस्पताल के अधिकारियों ने आरोप को ख़ारिज करते हुए कहा है कि बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल में लाया गया था और उनकी मृत्यु के लिए अस्पताल प्रबंधन ज़िम्मेदार नहीं है.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि ये अस्पताल बदइंतज़ामी का शिकार है. अस्पताल में मरीज़ों की भीड़ रहती है और कई मरीज़ फ़र्श पर सोने को मजबूर रहते हैं.

अस्पताल के एक अधिकारी दिलीप कुमार पाल ने बीबीसी को बताया कि छह बच्चों की मृत्यु मंगलवार को हुई और छह अगले दिन यानी बुधवार को मर गए.

उन्होंने कहा,"हम लगातार इलाज और सेवाओं में सुधार की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन बच्चों की मृत्यु इसलिए हो रही है क्योंकि उन्हें बहुत गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था."

विरोध प्रदर्शन

आम लोगों में अस्पताल प्रबंधन के प्रति काफ़ी ग़ुस्सा है. बीमारी से मरे बच्चों के माता-पिताओं ने बुधवार को अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

लेकिन अस्पताल के अधिकारियों ने कहा है कि प्रदर्शनकारी बाहर के लोग थे और वो अस्पताल में समस्या पैदा करने के मक़सद से इकट्ठा हुए थे.

जून में 25 बच्चों की मृत्यु के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जाँच करवाने की घोषणा की थी क्योंकि तब भी कई अभिभावकों और माता-पिताओं ने अस्पताल में बदइंतज़ामी की शिकायत की थी.

पर अस्पताल ने तब भी ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी.

संवाददाताओं का कहना है कि अस्पताल में सुविधाओं की भारी कमी है और यहाँ लाए जाने वाले बीमार बच्चों की तादाद काफ़ी ज़्यादा होती है. बीमार बच्चों को जहाँ तहाँ अस्पताल के फ़र्श पर सोते देखा जा सकता है क्योंकि अस्पताल में पर्याप्त बिस्तर मौजूद नहीं है.

इससे पहले भी 2002 में इन्हीं परिस्थितियों में इस अस्पताल में 30 बच्चों की मृत्यु हो गई थी.

'असमय मृत्यु'

बच्चों की मृत्यु की ख़बर आने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अस्पताल का दौरा किया और बाद में संवाददाताओं को बताया कि कमज़ोर और कुपोषण के शिकार कई बच्चों को दूर दराज़ के इलाक़ों से अस्पताल लाया जाता है.

उन्होंने कहा, "कमज़ोर बच्चों के बचने की संभावना यूँ भी बहुत कम होती है. अस्पताल में आधुनिक औज़ार मौजूद हैं लेकिन मरीज़ों की भीड़ बहुत ज़्यादा होती है क्योंकि कोलकाता में बच्चों का कोई और अस्पताल नहीं है."

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमार बच्चे और उनकी माताएँ एक ही बिस्तर पर सोते हैं जो अस्वास्थ्यकर है. इससे बच्चों में बीमारी फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है.

उन्होंने शहर में बच्चों का एक और अस्पताल खोलने की घोषणा की है.

ममता बनर्जी ने स्वीकार किया कि राज्य में शिशु मृत्यु दर पूरे देश से ज़्यादा है. राज्य में हर साल 44 हज़ार बच्चे बीमारियों से असमय मर जाते हैं.

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