इतिहास के पन्नों में 28 अक्तूबर

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि साल 2001 में इसी दिन पाकिस्तान के बहावलपुर में एक चर्च में 17 लोगों को क़त्ल कर दिया था. इसी दिन साल 1962 में सोवियत संघ ने क्यूबा मिसायल संकट के बाद अपने कदम खींचने की घोषणा की थी और दुनिया परमाणु महायुद्ध से बच गई थी.

2001 : पकिस्तान में कई ईसाइयों का क़त्ल

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption यह पाकिस्तान के इतिहास में ईसाइयों पर हुआ सबसे बड़ा हमला था

इस दिन पूर्वी पाकिस्तान के बहावलपुर में कुछ नकाबपोश बंदूकधारियों ने एक चर्च में घुस कर अचानक गोलियां चलाना शुरू कर दीं और वहां प्रार्थना कर रहे 17 लोगों को मार डाला. मरने वालों में बच्चों के अलावा एक पुलिस कर जवान भी शामिल था जिसकी चर्च में तैनाती की गई थी.

पाकिस्तान के इतिहास में ईसाइयों पर हुए सबसे बड़े हमले के पीछे कौन लोग थे ये फ़ौरन ही नहीं पता चल पाया. इस हमले में बचने वालों से बस इतना पता चल पाया कि हमलावरों ने गोलियां चलाते हुए यह कहा था कि पाकिस्तान ईसाईयों की कब्रगाह बन जाएगा.

एक दूसरे प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हमलावर छह थे और मोटरसाईकलों पर सवार हो कर आये थे. हमलावरों ने आते ही सबसे पहले वहां मौजूद पुलिस कर्मियों पर गोलियां चलाईं उसके बाद उन्होंने चर्च के अंदर घुस कर बाहर निकलने के रास्ते बंद कर दिए और गोलियों के बरसात शुरू कर दी. पाकिस्तान के ईसाई समुदाय देश की कुल आबादी का महज़ एक फ़ीसदी है.

साल 2002 के जुलाई महीने में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया. पुलिस का दावा था कि यह लोग प्रतिबंधित सुन्नी संगठन लश्कर ए जांगवी के सदस्य थे और चर्च पर हमले के पीछे थे.

1962 : क्यूबन मिसायल संकट का अंत

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption क्यूबा मिसायल संकट के बाद जॉन एफ़ कैनेडी का लोकप्रियता ग्राफ और ऊपर चढ़ गया

इस दिन सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता निकिता ख्रुश्चेव ने मास्को के सरकारी रेडियो से घोषणा की थी कि उनका देश अमरीका के निशाने पर सधी, क्यूबा में तैनात परमाणु मिसायलें हटा लेगा.

उनकी इस घोषणा के साथ दुनिया ने राहत की सांस ली. वरना ऐसा लग रहा था कि शीत युद्ध के ज़माने की महाशक्तियां दुनिया को परमाणु युद्ध की तरफ़ खींच ले जायेगीं.

सोवियत नेता की इस घोषणा के के बाद अमरीका के राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी ने इस कदम का स्वागत किया. कैनेडी ने इस बात का भी वायदा किया कि अमरीका बदले में वामपंथी शासित क्यूबा पर हमला नहीं करेगा साथ ही क्यूबा के चारों तरफ़ की गई अमरीकी नौसेना की नाके बंदी भी उठा ली जायेगी.

यह सारा संकट 14 अक्तूबर को शुरू हुआ था जब अमरीका के दो यू-2 जासूसी हवाई जहाज़ों को पता लगा कि क्यूबा की धरती पर कई ऐसी मिसयालें तैनात हो गईं हैं जो की अमरीका की धरती पर आसानी से पहुँच सकतीं हैं.

बौखलाए अमरीका ने इस तैनाती की निंदा की और क्यूबा की नौसैनिक नाकेबंदी कर दी. कैनेडी ने इस बात की भी धमकी दी कि अगर अमरीका पर क्यूबा से हमला हुआ तो अमरीका सीधे सोवियत संघ के खिलाफ़ युद्ध छेड़ देगा.

चीन ने सोवियत संघ ने इस फ़ैसले की निंदा की और कहा कि चीन क्यूबा के साथ हर अच्छे और बुरे में रहेगा. खुर्श्चेव ने क्यूबा से सोवियत मिसयालें हटाने के बदले में यह मांग कि अमरीका एक तो क्यूबा पर हमला ना करने का वचन दे दूसरा वो तुर्की में तैनात अपनी जूपिटर मिसयलों को भी हटाये.

कैनेडी ने यूँ तो सार्वजानिक रूप से तुर्की सेअपनी मिसायालें हटाने की बात नहीं मानी लेकिन गुप्त रूप से उन्होंने ऐसा करने के आदेश दे दिए.

संबंधित समाचार