लीबिया में फ़ौजी कार्रवाई ख़त्म करने का फ़ैसला

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Image caption नैटो के हवाई हमले ने गद्दाफ़ी समर्थकों की सैन्य शक्ति को काफ़ी नुक़सान पहुंचाया था.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लीबिया के ऊपर उड़ान निषिद्ध क्षेत्र ख़त्म करने का फ़ैसला कर लिया है.

इसके साथ ही लीबिया में फ़ौजी कार्रवाई के अंत की भी घोषणा की गई है.

ये फ़ैसले 31 अक्तूबर की रात से लागू किए जाएंगे.

गुरूवार को सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से लीबिया में विदेश सैन्य कार्रवाई को ख़त्म करने के प्रस्ताव को पारित किया.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि ये प्रस्ताव एक शांतिपूर्ण और प्रजातांत्रिक ली बिया के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

हालाकि लीबिया की अंतरिम सरकार ने नैटो से अपने सैन्य अभियान को अभी जारी रखने की अपील की थी.

लेकिन सुरक्षा परिषद के राजनयिकों ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि लीबिया में नागरिकों की सुरक्षा का जो जनादेश मिला था उसे पूरा कर लिया गया है.

इसी साल मार्च में सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर लीबिया में नागरिकों की सुरक्षा के लिए सदस्य देशों को हर ज़रूरी क़दम उठाने का अधिकार दिया था.

सुरक्षा परिषद में ये प्रस्ताव तब पेश किया गया था जब लीबिया के तत्कालीन राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफ़ी ने अपने विरोधियों को बलपूर्वक कुचलने का एलान किया था.

लीबिया में मौजूद संवाददाताओं का कहना है कि नैटो की सैन्य कार्रवाई ने कर्नल गद्दाफ़ी की सत्ता को ख़त्म करने मे अहम भूमिका निभाई थी.

विद्रोहियों ने अगस्त में कर्नल गद्दाफ़ी का तख़्ता पलट दिया था और पिछले सप्ताह सिर्त में गद्दाफ़ी मारे गए थे.

लेकिन रूस, चीन, दक्षिण अफ़्रीक़ा, भारत और ब्राज़ील ने नैटो की सैन्य कार्रवाई का विरोध किया था और नैटो पर सुरक्षा परिषद के जनादेश के उल्लंघन करने का आरोप लगाया था.

लेकिन गुरूवार को संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत सुसान राइस ने नैटो के हस्तक्षेप का बचाव करते हुए कहा कि इतिहास इसे सुरक्षा परिषद के एक गौरवान्वित अध्याय की तरह देखेगा.

क़ानूनी कार्रवाई

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Image caption पकड़े जाते वक़्त ग़द्दाफ़ी जीवित थे.

लीबिया की अंतरिम सरकार ने कहा है कि कर्नल मुअम्मार ग़द्दाफ़ी की हत्या करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जाएगा.

नेशनल ट्रांज़िशनल काउंसिल के उप राष्ट्रपति अब्देल हाफ़िज़ गोगा ने ये ऐलान किया है.

उन्होंने कहा है कि कर्नल ग़द्दाफ़ी को मारे जाने की घटना की जाँच पहले ही शुरू की जा चुकी है.

गोगा का कहना है कि ग़द्दाफ़ी को मारने का फ़ैसला किसी का व्यक्तिगत फ़ैसला था.

पिछले हफ़्ते कर्नल ग़द्दाफ़ी को पकड़े जाने का वीडियो जारी किया गया था. इसमें वो जीवित नज़र आए औपर उन्हें विद्रोही सैनिकों ने घेर रखा था.

लेकिन फिर बताया गया कि गोली लगने से उनकी मृत्यु हो गई. उस वक़्त बहुत सी परस्पर विरोधी ख़बरें आईं.

कुछ ख़बरों में कहा गया कि ग़द्दाफ़ी को जिस व्यक्ति ने गोली मारी उसने उनकी सुनहरी पिस्तौल लहराते हुए ये बात स्वीकार की थी.

लेकिन विद्रोही नेताओं ने ये भी कहा कि ग़द्दाफ़ी को पकड़े जाते वक़्त दोनों ओर से हुई गोलीबारी में वो मारे गए.

फिर कुछ वीडियो ऐसे भी जारी हुए जिनमें विद्रोही सैनिकों को ग़द्दाफ़ी की बेइज़्ज़ती करने के लिए उनके साथ यौन दुराचार जैसी हरकतें करते दिखाया गया था.

मानवाधिकार संस्थाओं ने ग़द्दाफ़ी के शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह करने वाले सैनिकों पर आरोप लगाए हैं कि सियर्त क़स्बे में उन्होंने ग़द्दाफ़ी समर्थक सैनिकों का सामूहिक रूप से मौत के घाट उतार दिया.

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