इतिहास के पन्नों में 29 अक्तूबर

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि इसी दिन साल 2005 तीन क्रमवार बम धमाकों ने भारत की राजधानी दिल्ली में 59 जानें ले लें थीं. वर्ष 1999 में इसी दिन भारत के राज्य उड़ीसा में आए एक भीषण चक्रवात ने हज़ारों लोगों की जानें ले लीं थीं.

2005: दिल्ली में घातक चरमपंथी हमले

Image caption चरमपंथी हमलों में कम से कम 59 लोगों की मौत हो गई थी.

इसी दिन साल 2005 में जब दिल्लीवासी दीपावली के दो दिन पहले त्यौहार की गहमा गहमी में डूबे हुए थे तभी शहर के दो व्यस्त इलाकों पहाड़गंज और सरोजिनी नगर के बाज़ारों में धमाके हुए.

इसके अलावा शहर के गोविन्दपुरी इलाके में एक बस के भीतर भी एक बम फटा था. कुल मिला कर इन चरमपंथी हमलों में कम से कम 59 लोगों की मौत हो गई थी.

तीनों धमाके शाम 5.30 से 6.05 के बीच हुए जब बाज़ार दीपावली की खरीदारी करने वालों से भरे हुए थे.

भारत सरकार का मानना था कि इन धमाकों के पीछे भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय भारत विरोधी चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तोयबा का हाथ है.

हमले के चंद दिनों बाद पाकिस्तान स्थित एक चरमपंथी संगठन इस्लामिक इंकलाब महाज़ ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी.

1999: उड़ीसा में चक्रवात ने हज़ारों जाने लीं

Image caption 250 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार वाली हवाओं के साथ आए तूफ़ान के रास्ते में जो कुछ भी पड़ा वो तहस नहस हो गया.

इसी दिन साल 1999 में एक चक्रवात आया था जिसने पूर्वी भारत के इस तटीय प्रदेश को झिंझोड़ कर रख दिया था.

बहुत सारे इलाकों का सड़क, रेल मार्गों से संपर्क कट गया क्योंकि इस 250 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार वाली हवाओं के साथ आए इस चक्रवात के रास्ते में जो कुछ भी पड़ा वो सब तहस नहस हो गया.

नुकसान का तत्काल अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो गया था क्योंकि बहुत बड़े इलाके में दूरसंचार से लेकर बिजली तक सभी संसाधन ध्वस्त हो गए थे.

इस चक्रवात की वजह से समुद्र की लहरे भी इतनी बड़ी और तेज़ हो कर तट की तरफ़ झपटीं कि समुद्र के नज़दीक बसे कई गावों नेस्तनाबूद हो गए.

एक अनुमान के मुताबिक इस तूफ़ान की वजह से क़रीब दस हज़ार जानें गईं. इस चक्रवात के बाद कई इलाकों में साफ़ पानी के सभी साधन नष्ट हो गए क्योंकि उनमे आदमियों और जानवरों की लाशें लाशें भर गईं थीं.

बड़ी संख्य में लोग भूख और बीमारियों की वजह से भी मौत का शिकार हुए थे.

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