ग्रीस: पापैंद्रू जनमत संग्रह का प्रस्ताव 'वापस लेने को तैयार'

Image caption ग्रीस के प्रधानमंत्री पापैंद्रू पर इस्तीफ़ा देने के लिए काफ़ी दबाव है.

गुरूवार को ग्रीस में पूरे दिन चली राजनीतिक गहमागहमी के बाद प्रधानमंत्री जॉर्ज पापैंद्रू की सरकार का भविष्य अभी तक अधर में लटका है.

जॉर्ज पापैंद्रू ने अपने मंत्रिमंडल की आपातकालीन बैठक को संबोधित करते हुए कहा है कि अगर विपक्ष साथ दे तो वो यूरोपीय संघ के आर्थिक पैकेज पर जनमत संग्रह कराने के अपने प्रस्ताव को वापस लेने को तैयार है.

उनके अचानक जनमत संग्रह के प्रस्ताव पर पूरे यूरोपीय संघ और सरकार में ही उनके विरोधियों ने आपत्ति जताई थी.

जॉर्ज पापैंद्रू विपक्ष के साथ गठबंधन करने को तैयार है लेकिन विपक्ष इस पर राज़ी नही है. वह जॉर्ज पापैंद्रू के इस्तीफ़े के साथ ग्रीस में समय से पूर्व चुनाव कराने की मांग कर रही है.

हालाकि सत्तापक्ष का मानना है कि समय से पूर्व चुनाव कराने से पूरी आर्थिक मदद योजना खतरे में पड़ जाएगी.

सरकार पर संकट

पापैंद्रू सरकार पर संकट उस समय आया है जब यूरोज़ोन ऋण संकट से जुड़ी एक योजना पर जनमत संग्रह कराने के पापैंद्रू के प्रस्ताव का विरोध हो रहा है.

कुछ रिपोर्टों के अनुसार पापैंद्रू विपक्ष की मांग के अनुसार इस्तीफ़ा दे सकते हैं लेकिन कुछ अन्य विरोधाभासी रिपोर्टों के अनुसार वो पद नहीं छोड़ेंगे.

पहले आ रही ख़बरों मे कहा जा रहा था कि पापैंद्रू इस्तीफ़ा देंगे जिसके बाद एक गठबंधन सरकार बनेगी जिसकी अगुआई यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पूर्व उपाध्यक्ष लूकास पापाडेमोस करेंगे.

हालांकि सरकारी मीडिया ने कहा है कि पापैंद्रू ने बैठक के दौरान इस्तीफ़े की पेशकश नहीं की और वो पद पर बने रहना चाहते हैं.

यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब कम से कम चार कैबिनेट मंत्रियों और संसद के कई सदस्यों ने कहा था कि वो यूरोज़ोन पैकेज के संबंध में देश में जनमत संग्रह कराने की पापैंद्रू की योजना का समर्थन नहीं करेंगे.

पापैंद्रू की योजना को कैबिनेट में समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार गिरने के आसार बन गए थे.

आर्थिक मदद

यूरोज़ोन के तहत ग्रीस को 130 अरब यूरो का ऋण मिलेगा और उसके पचास प्रतिशत ऋण माफ कर दिए जाएंगे.

विपक्षी दल के नेता एंटोनिस समारास ने भी गुरुवार को कहा था कि एक कार्यवाहक सरकार बने जो यूरोपीय संघ के समझौते को लागू कर सके.

प्रधानमंत्री पापैंद्रू ने पहले तो संसद में बहुमत साबित करने की बात कही थी लेकिन जब उनके ही मंत्रियों ने उनकी योजना को समर्थन नहीं दिया तो अब वो इस्तीफ़े कि लिए तैयार बताए जा रहे हैं.

उधर जी-20 की बैठक में भी यूरोज़ोन ऋण संकट और ग्रीस का मुद्दा छाए रहने की संभावना है.

कान में शुरु हुई बैठक से पहले फ्रांस और जर्मनी ने साफ कह दिया है कि ग्रीस को तब तक अतिरिक्त पैसा नहीं दिया जाएगा जब तक वो यूरोज़ोन में रहने की प्रतिबद्धता नहीं व्यक्त करता और अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता.

चीन ने कहा है कि वो यूरोज़ोन को बचाने के लिए बने फंड में निवेश के लिए प्रतिबद्धता नहीं जता सकता जब तक ग्रीस की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती.

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