बाज़ार तय करेंगे तेल की क़ीमत: मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption मनमोहन सिंह सरकार ने ही पेट्रोल के क़ीमतों पर से सरकारी नियंत्रण हटाने का फ़ैसला किया था

यूपीए के सहयोगी दलों की नाराज़गी के बावजूद पेट्रोल की क़ीमत में हुई बढ़ोत्तरी को वापस लेने के मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि बाज़ार ही तेल की क़ीमत तय करेंगे.

फ़्रांस के शहर कान में हुए जी-20 शिख़र सम्मेलन की समाप्ति के बाद शुक्रवार की शाम पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक तरह से पेट्रोल की क़ीमतों में हुई बढ़ोत्तरी को सही ठहराते हुए कहा कि ईंधन मूल्यों को और अधिक नियंत्रणमुक्त किए जाने की ज़रूरत है.

बाज़ार को अपने हिसाब से चलने की इजाज़त दिए जाने की वकालत करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, ''यह मूल्य नियंत्रण वह सामान्य दिशा है जिस पर हमें आगे बढ़ना है. मुझे लगता है कि क़ीमतों को नियंत्रणमुक्त किए जाने का क़दम इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. जैसा कि मैं कह रहा हूं, ये काफ़ी संवेदनशील क्षेत्र हैं और मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि आख़िरकार हमें बाज़ार को अपना स्तर तय करने की अनुमति देनी होगी, सिर्फ़ उन चीज़ों को छोड़कर जो सीधे जनता से जुड़ी हुईं हैं.''

एक पत्रकार ने जब उनसे कहा कि देश में पेट्रोल क़ीमतों में वृद्धि का ज़ो़रदार विरोध हो रहा है और यहां तक कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी तक दी है.

इस पर मनमोहन सिंह का जवाब था, ''ऐसे में बदलाव की दिशा बिल्कुल साफ़ है. हमें क़ीमतों को नियंत्रणमुक्त करने की दिशा में निश्चित रूप से बढ़ना होगा.''

प्रधानमंत्री का ये बयान ऐसे समय में आया है जब यूपीए के अहम घटक दल ममता बैनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने यूपीए गठबंधन से हटने की धमकी दी है और कहा है कि इस बारे में प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद कोई फ़ैसला लिया जाएगा.

दूसरे घटक दल डीएमके ने गठबंधन से हटने की धमकी तो नहीं दी है लेकिन कहा है कि आम लोगों के हित में पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी को वापस लिया जाना चाहिए.

भाजपा, सीपीएम सहित कई दलों ने इस बढ़ोत्तरी को जनविरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है.

एमएफ़एन का स्वागत

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत व्यापार में सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र यानि एमएफ़एन का दर्जा देने के पाकिस्तान के निर्णय का स्वागत करता है.

ऊर्दू भाषा की एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, ''एमएफ़एन का दर्जा हमें काफ़ी पहले दिया जाना चाहिए था. हमने उन्हें 17 साल पहले यह दर्जा दिया था. लेकिन देर आयद दुरूस्त आयद, मै इसका स्वागत करता हूं.''

मनमोहन सिंह ने कहा कि हम इस बात से खुश है कि जी-20 की संयुक्त घोषणा में बैंकिंग पारदर्शिता और कर धोखाधड़ी एवं चोरी तथा अवैध प्रवाह पर रोक लगाने के भारत के आह्वान को शामिल किया गया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोपीय बाजार सही तरीके से चले, इसमें भारत का भी हित है.

उनका कहना था कि यूरो क्षेत्र को निश्चित रूप से साथ मिलकर काम करना चाहिए.

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