फ़लस्तीनी कोशिशों को लगा 'नया झटका'

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Image caption सितंबर में फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने सदस्यता का आवेदन दिया था

एक राष्ट्र के रूप में संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता हासिल करने की फ़लस्तीनियों की कोशिशों को झटका लगा है.

संयुक्त राष्ट्र के एक राजनयिक ने बीबीसी को बताया है कि ब्रिटेन, फ़्रांस और कोलंबिया फ़लस्तीनी सदस्यता पर होने वाले किसी भी तरह के मतदान में ग़ैर हाज़िर रहेंगे.

इस राजनयिक के मुताबिक़ इन देशों ने सुरक्षा परिषद की एक समिति के सामने अपना रुख़ स्पष्ट किया है. हालाँकि इन देशों ने अभी अपने रुख़ की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की है. लेकिन इससे फ़लस्तीनियों की कोशिशों को झटका लगा है.

फ़लस्तीनी इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों से समर्थन की कोशिश कर रहे थे. सुरक्षा परिषद की एक समिति संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता को लेकर फ़लस्तीनी आवेदन पर विचार कर रही है और माना जा रहा है कि ये समिति अगले सप्ताह अपनी रिपोर्ट देगी.

संयुक्त राष्ट्र के एक राजनयिक के मुताबिक़ इन देशों ने सुरक्षा परिषद की समिति की एक प्राइवेट बैठक के दौरान अपना रुख़ स्पष्ट किया है. राजनयिक के मुताबिक़ जर्मनी ने भी ये घोषणा की है कि वो फ़लस्तीनी कोशिशों का समर्थन नहीं कर सकता.

रुख़

हालाँकि जर्मनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है वो इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मतदान करेगा या फिर मतदान में ग़ैर हाज़िर रहेगा. हालाँकि वास्तविक रूप में देखें, तो इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, क्योंकि अमरीका पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वो फ़लस्तीनी आवेदन को वीटो करेगा.

लेकिन राजनीतिक और नैतिक रूप में इसकी काफ़ी अहमियत है. फ़लस्तीनी ये उम्मीद कर रहे थे कि वे बहुमत का समर्थन हासिल करके अमरीका को अलग-थलग कर देंगे. लेकिन अब ये मुश्किल दिखता है.

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के एक सूत्र का कहना है कि विदेश मंत्री विलियम हेग बुधवार को संसद में इस फ़ैसले की व्याख्या करेंगे.

सैद्धांतिक रूप में ब्रिटेन और फ़्रांस फ़लस्तीनियों को राष्ट्र का दर्जा दिए जाने का समर्थन करते हैं. लेकिन इन देशों का मानना है कि इस समय फ़लस्तीनियों की ये कोशिश शांति प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीदों को नुक़सान पहुँचा सकती है.

ये भी चिंता जताई जा रही है कि अमरीका के साथ फ़लस्तीनियों के टकराव से मध्य पूर्व में हिंसा बढ़ सकती है. दूसरी ओर फ़लस्तीनियों ने संकेत दिया है कि वो अपने आवेदन पर सुरक्षा परिषद में मतदान को लेकर उत्सुक हैं, भले ही उन्हें बहुमत न मिले.

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