यूरोप में दक्षिणपंथी दलों का प्रभाव बढ़ा

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Image caption यूरोपीय युवा प्रवासन और राष्ट्रीय संस्कृति के सवाल पर सरकारों से नाराज़ दिखते हैं

ब्रितानी थिंक टैंक डेमॉस का कहना है कि पश्चिमी यूरोप में पिछले एक दशक में लोकलुभावन एजेंडे वाली दक्षिणपंथी पार्टियों का समर्थन बढ़ा है.

डेमॉस का कहना है कि उनकी लोकप्रियता सोशल मीडिया के उभरने के साथ-साथ बढ़ी है.

थिंक टैंक का कहना है कि उसने फ़ेसबुक में विज्ञापनों का सहारा लिया और ग्यारह यूरोपीय देशों में लोकलुभावन एजेंडे वाले संगठनों के दस हज़ार से अधिक लोगों से अपना एक सर्वेक्षण फ़ॉर्म भरवाने सफल रहे हैं.

डेमोस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दक्षिण पंथी दलों की ओर आकर्षित होने वालों में से ज़्यादातर युवा हैं जो प्रवासन के ख़िलाफ़ हैं, वैश्विकरण की निंदा करते हैं और अपनी राष्ट्रीय संस्कृति के को लेकर चिंतित हैं.

लेबर पार्टी के नेता और ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने इस रिपोर्ट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस पर नज़र रखनी चाहिए.

संस्कृति और राष्ट्रवाद की चिंता

डेमॉस ने पहले ऑनलाइन सर्वेक्षण में 11 यूरोपीय देशों के 14 राजनीतिक दलों और संगठनों के 10 हज़ार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया.

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Image caption ओस्लो में हमला करने वाला युवक भी दक्षिणपंथी पार्टियों के विचारों से प्रभावित था

इस रिपोर्ट से पता चलता है कि युवाओं में, ख़ासकर पुरुषों में कट्टरपंथी राष्ट्रवादी भावनाएँ बढ़ती जा रही हैं.

ये युवा अपनी सरकारों से और यूरोपीय संघ की निंदा करते हैं और उनकी चिंता में अपनी सांस्कृतिक पहचान, प्रवासन और इस्लाम का बढ़ता प्रभाव प्रमुख है.

ये रिपोर्ट ओस्लो में हुई घटना के तीन महीने बाद आई है जिसमें एक दक्षिणपंथी गुटों के समर्थक युवक ने विस्फोट और अंधाधुंध गोलीबारी करके 69 लोगों की जान ले ली थी.

हालांकि दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों ने इस युवक को अपने दल का सदस्य मानने से इनकार कर दिया है लेकिन पुलिस की जाँच से ये सामने आया है कि वह इंटरनेट पर प्रवासन-विरोधी और राष्ट्रवादी विचारधारा वाले समूहों से जुड़ा हुआ था.

डेमॉस ने अपने आंकड़े जुलाई और अगस्त में जुटाए हैं. उस समय तक यूरोज़ोन में संकट गहराया नहीं था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 'प्रवासन-विरोधी' और 'इस्लाम से भय' के विचारों पर काम करने वाली पार्टियों का प्रभाव अब फ़्रांस, इटली और ऑस्ट्रिया के अपने पारंपरिक गढ़ से बाहर भी फैल गया है और अब उदारवादी नीदरलैंड्स और स्केंडिनेवियाई देशों में उसका प्रभाव है.

रिपोर्ट के अनुसार अब आठ देशों में इन दलों की अहम संसदीय उपस्थिति है.

डेमॉस का कहना है कि इन दलों की ओर से सड़कों पर प्रदर्शनों और दूसरे कार्यक्रमों में बढ़ोत्तरी हुई है और युवा सोशल मीडिया, ख़ासकर फ़ेसबुक के ज़रिए विचारों के आदान प्रदान में लगे हुए हैं.

थिक टैंक का कहना है कि दक्षिण पंथी दलों का प्रभाव औपचारिक सदस्यता से कहीं ज़्यादा फैल गया है.

इस रिपोर्ट के मुख्य लेखक जैमी बार्टलेट ने कहा है कि ये इन युवाओं की गतिविधियों पर नज़र रखना महत्वपूर्ण है.

उनका कहना है, "यूरोप में ऐसे लाखों लोग हैं, वे मुख्यधारा की राजनीति और यूरोपीय राजनीतिक संस्थाओं से निराश हैं, वे अपनी सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को हो रहे नुक़सान से चिंतित हैं और वे लगातार लोकलुभावन एजेंडे वाली पार्टियों की ओर जा रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे उनकी चिंताओं के बारे में बात कर रहे हैं."

उनका कहना है कि ये युवा ज़्यादातर मुख्यधारा के राजनीतिज्ञों की नज़र में नहीं हैं और ज़रुरत है कि वे उनके साथ बैठें, उनकी बातें सुनें और उसका जवाब दें.

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