ग़ैरकानूनी हथियारों से कृषि उपकरण !

इमेज कॉपीरइट
Image caption मुज़फ़्फरपुर के पुलिस प्रमुख राजेश कुमार (सभी तस्वीरें प्रशांत रवि/बिहारफोटो)

बिहार में पुलिस ने थानों और मालख़ानों में ज़ब्त किए गए बहुत सारे ग़ैरकानूनी हथियारों से निपटने का एक नायाब तरीका ढ़ूँढ़ निकाला है.

उन्होंने इन हथियारों को पिघला कर कृषि और बागवानी उपकरण बनाने का फ़ैसला किया है.

इस सोच के पीछे बिहार के पुलिस प्रमुख अभ्यानंद हैं. उनका कहना है, ‘ कानूनी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद पुलिस थानों के मालख़ानों में रखे गए हथियारों का कोई इस्तेमाल नहीं है. उनमें से मृत शव की तरह बदबू आती है. ’

अभ्यानंद कहते हैं, ‘क्या हम अपराधियों के शवों को लंबे समय तक रख सकते हैं. सिर्फ़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही सँभाल कर रखा जाता है. अनचाहे हथियारों के साथ भी यही नियम लागू होना चाहिए.’

पुलिस प्रमुख ने बीबीसी को बताया कि बिहार के पुलिस मेनुअल में उन्हें इस्तेमाल न किए जाने वाले उन ज़ब्त हथियारों को नष्ट करने का अधिकार दिया गया है जो काफ़ी समय से पुलिस थानों में पड़े हुए हैं.

उनका यह भी कहना है कि आपराधिक मुकदमे के समाप्त हो जाने के बाद बिहार की स्थानीय अदालतें भी ज़ब्त हथियारों को नष्ट करने का आदेश दे सकतीं हैं.

लेकिन उनके अनुसार, ‘इन हथियारों को नष्ट करने से बेहतर विकल्प यह होगा कि इन्हें रिसाइकल कर खेती और बागबानी के उपकरण बनाए जाएं ताकि ग्रामीण लोग अपनी जीविका चला सकें.’

यह पहला मौका नहीं है जब बिहार के इस तेज़तर्रार अफ़सर ने कोई पहल की है. उनकी पहल से ही बिहार की अदालतों में फ़ास्ट ट्रैक मुकदमों की शुरुआत हुई है और सेवा निवृत्त सैन्य अधिकारियों को विशेष पुलिस दस्ते में नौकरी मिल पाना संभव हो सका है.

अक्तूबर में पहली बार दरभंगा ज़िले के पुलिस प्रमुख ने देसी पिस्तौल कट्टे को पिघलाकर कृषि उपकरण बनाने की अनुमति माँगी थी. मुख्य जूडिशल मजिस्ट्रेट ने इसकी अनुमति दे भी दी थी लेकिन बहुत प्रयासों के बावजूद स्थानीय लोहार इससे कृषि उपकरण नहीं बना पाया.

लेकिन यहाँ से शुरुआत तो हो गई और नज़दीकी ज़िले मुज़फ़्फ़रपुर के पुलिस प्रमुख ने अनचाहे हथियारों को रिसाइकल कर हँसिया और फावड़े बनवा डाले.

पुलिस प्रमुख राजेश कुमार ने बीबीसी को बताया, ‘इससे हथियारों का दुरुपयोग रुकेगा और समाज को एक सकारात्मक संदेश जाएगा.’

संबंधित समाचार