इतिहास के पन्नों में 10 नवंबर

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो 10 नवंबर के दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं थीं.

1995: नाईजीरिया में मानवाधिकार कार्यकर्ता को फांसी

Image caption केन सारा-वीवा की फांसी का दुनिया भर ने विरोध किया था.

दुनिया भर के लोगों की अपील को ठुकराते हुए नाइजीरिया की सरकार ने मानवाधिकार कार्यकर्ता केन सारो-वीवा को 1995 में आज ही के दिन फासी दे दी थी.

केन सारो-वीवा और आठ दूसरे असंतुष्टों को स्थानीय समयानुसार सुबह साढ़े सात बजे दक्षिणी शहर पोर्ट हारकोर्ट के एक जेल में फांसी दी गई.

दस दिन पहले इन लोगों को अदालत ने हत्या के चार मामले में शामिल होने का दोषी क़रार दिया था.

केन सारो-वीवा का कहना था कि उन लोगों को सरकार ने जानबूझकर फंसाया है क्योंकि वे दक्षिणी नाईजीरिया के निजैर-डेल्टा क्षेत्र में तेल-उद्घोग का विरोध कर रहे थे.

एंग्लो-डच कंपनी शेल नाईजीरिया में तेल-खनन करने वाली सबसे बड़ी कंपनी थी. केन सारा-वीवा और उनकी ओगोनी जनजाति इस कंपनी के ज़रिए फैलाए जा रहे प्रदूषण का विरोध कर रहे थे और कंपनी के मुनाफ़े में हिस्सेदारी की मांग कर रहे थे.

1993 में सत्ता में आए सैन्य शासक जनरल सनि अबाचा ने ओगोनी जनजाति के कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया था.

केन सारा-वीवा और उनके साथ आठ दूसरे लोगों की फांसी को ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री जॉन मेजर ने 'न्यायिक हत्या' क़रार दिया था.

अगले दिन नाईजीरिया को राष्ट्रकुल से निलंबित कर दिया गया और यूरीपीय संघ ने नाईजीरिया पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए.

1998 में सनि अबाचा की मौत के बाद नाईजीरिया पर लगे प्रतिबंध हटा लिए गए और उसे राष्ट्रमंडल देशों में शामिल कर लिया गया.

केन सारा-वीवा की फांसी के बाद शेल कंपनी ने भी अस्थाई तौर पर कुछ दिनों के लिए काम बंद कर दिया था.

1982: सोवियत नेता ब्रेज़नेव की मौत की ख़बर

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Image caption लियोनोड ब्रेज़नेव की मौत की ख़बर को सोवियत संघ ने पूरे एक दिन तक राज़ रखा.

1982 में आज ही के दिन ये ख़बर फ़ैलने लगी कि सोवियत संघ के नेता लियोनिड ब्रेज़नेव की मौत हो गई है. ब्रेज़नेव ने सोवियत संघ पर 20 वर्षों तक शासन किया था.

इस ख़बर को और बल इस बात से मिलने लगी कि टीवी कार्यक्रम में अचानक बदलाव होने लगे. न्यूज़ एंकरों ने काले कपड़े पहन लिए और मनोरंजन के कार्यक्रम की जगह सोवियत क्रांति और दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ी डॉक्य़ूमेंट्री दिखाई जाने लगी.

ब्रेज़नेव पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे.

आख़िरकार अगले दिन सोवियत संघ ने उनके मरने की आधिकारिक घोषणा कर दी. सरकारी ख़बरों के अनुसार दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हुई थी.

सरकार ने उनके सम्मान में पांच दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की और पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ उन्हें क्रेमलिन के रेड स्कॉयर में दफ़न कर दिया गया.

1964 में तत्कालीन सोवियत नेता क्रश्चेव का तख़्ता पलट कर ब्रेज़नेव सत्ता में आए थे.

ब्रेज़नेव की मौत के बाद यूरी एंड्रोपोव सोवियत संघ के नए नेता चुने गए.

उनके बाद मिख़ाइल गौरवाचेव मार्च 1985 में सोवियत संघ के नेता बने.

गौरवाचेव ने आते ही 'ग्लैस्नॉस्ट' और 'पेरेस्ट्रॉयका' की नीति शुरू की जिसका मुख्य उद्देश्य देश में आर्थिक और राजनीतिक सुधार लाना था.

लेकिन उनकी इस नीति के कुछ साल बाद ही 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया.

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