क्या है इटली का आर्थिक संकट?

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Image caption बर्लुस्कोनी को आर्थिक संकट की वजह से पद छोड़ना पड़ रहा है

इटली की अर्थव्यवस्था पर से निवेशकों का विश्वास डिग गया है.

दस वर्ष के इतालवी बांड कोई ख़रीदने को तैयार नहीं है, इसके लिए इटली से निवेशक सात प्रतिशत ब्याज माँग रहे हैं जो अपने यूरोपीय संघ के गठन के बाद से अब तक का रिकॉर्ड है.

मामले की गंभीरता इसी से समझ में आती है कि ऐसे ही बांड के लिए जर्मनी सिर्फ़ डेढ़ प्रतिशत ब्याज देता है.

इटली की अर्थव्यस्था उसी स्तर पर पहुँच गई है जहाँ ग्रीस की अर्थव्यस्था है जबकि यूरोपीय संघ की भारी आर्थिक सहायता के बिना उसे दिवालिया होने से बचाना मुश्किल है.

इटली को अपने पिछले कर्ज़ों की किस्तें चुकाने के लिए और कर्ज़ चाहिए, कोई भी इटली को नए कर्ज़ देने को तैयार नहीं है सिवाय इसके कि उन्हें मिलने वाला ब्याज बहुत ऊँचा हो.

अब यह इटली के हिसाब से बहुत ही मारक स्थिति है क्योंकि अगर ऊँचे ब्याज दर पर नया कर्ज़ लिया गया तो कर्ज़ की किस्तें कम होने के बदले बढ़ जाएँगीं.

बैंकों को डर है कि अगर इटली अफने कर्ज़ चुका नहीं पाया तो उनका पैसा डूब जाएगा, इटली का सरकारी ख़र्च काफ़ी अधिक है जबकि उसकी विकास दर बहुत धीमी है.

फ्रांस और जर्मनी के बाद इटली यूरोज़ोन की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था है, उसे डूबने से बचाना बहुत ज़रूरी है लेकिन उसे डूबने से बचाना आसान नहीं है.

इटली को वर्ष 2012 में 360 अरब यूरो बाज़ार से उधार लेना है ताकि वह अपने पिछले कर्ज़ चुका सके और डिफ़ॉल्टर होने की ज़िल्लत से बच सके.

जानकारों का कहना है कि इटली की आर्थिक समस्याएँ अल्पकाल में ठीक नहीं होने वाली हैं, निवेशकों को इस बात का भरोसा चाहिए कि इटली अपने सभी पिछले कर्ज़ चुका पाएगा, जिन देशों और बैंकों का पैसा इटली के कर्ज़ में फँसा है वे इटली में और पैसा नहीं लगाना चाहेंगे.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संपादक रॉबर्ट प्रेस्टन का कहना है कि इटली को अगर आर्थिक सहायता पैकेज देने की ज़रूरत हुई तो 440 अरब के कोष में सिर्फ़ 250 अरब यूरो बचे हैं जो नाकाफ़ी होंगे.

जिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों का पैसा कर्ज़ के रूप में इटली में लगा है वे किसी तरह इस कर्ज़ से छुटकारा पाना चाहता है और वे कर्ज़ औनी-पौनी क़ीमत पर दूसरी कंपनियों को बेचने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे माहौल में इटली जब नया कर्ज़ लेने की कोशिश करेगा तो निवेशकों में कितना उत्साह होगा यह सहज ही समझा जा सकता है.

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