यहाँ हर कोई ज़िंदा लौट कर आया

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Image caption इस गाँव का कोई भी व्यक्ति दोनों महायुद्धों में नहीं मारा गया

पहले विश्व युद्ध में ब्रिटेन के क़रीब 10 लाख लोग मारे गए थे. देश का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था, जहाँ से किसी न किसी ने अपनी जान न गँवाई हो.

लेकिन अपर स्लॉटर जैसे कुछ गाँव ज़रूर थे, जहाँ लड़ाई के लिए निकला हर सैनिक सुरक्षित घर लौटा था.

ब्रिटेन के दूसरे गाँवों की तरह यहां युद्ध का कोई स्मारक नहीं है. लकड़ी की दो पट्टिकाएं ज़रूर लगी हैं, जिसमें हर उस व्यक्ति और एक महिला का नाम अंकित है जिन्होंने दोनों विश्व युद्ध में भाग लिया था और सुरक्षित घर लौटे थे.

लेखक आर्थर मी ने शुरू में 32 ऐसी जगहें खोजी थीं, जहाँ का कोई व्यक्ति पहले विश्व युद्ध में नहीं मरा था. हाल के वर्षों में यह संख्या बढ़ कर 52 हो गई है.

इनमें से अपर स्लॉटर की तरह 14 ऐसे भी गाँव हैं, जहाँ दूसरे विश्व युद्ध में भी कोई नहीं मरा था. ऐसा नहीं था कि इन गाँवों से लड़ाई में गया कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ था, लेकिन यह सब लोग ज़िंदा लौट कर आए थे.

पूरे ब्रिटेन में 16000 ऐसे गाँव थे, जहाँ का कोई न कोई व्यक्ति इन दोनों विश्व युद्धों में मारा गया था.

80 साल के टोनी कॉलेट ने 1946 में अपर स्लॉटर की दूसरी लकड़ी की पट्टिका बनाई थी, जिसमें उन 35 लोगों को नाम अंकित थे, जो द्वितीय विश्व युद्ध में सुरक्षित घर लौटे थे.

इस पट्टिका को उस पट्टिका के बगल में लगाया गया था, जिसमें 24 पुरुषों और एक महिला का नाम लिखा हुआ था जो पहले विश्व युद्ध में अपनी जान बचा कर वापस लौटे थे.

दोनों महायुद्धों में हिस्सा

दोनों पट्टिकाओं में टोनी के पिता जॉर्ज कोलेट का नाम लिखा है. 1895 में जन्मे जॉर्ज उन कुछ लोगों में से थे, जिन्होंने दोनों विश्व युद्धों में भाग लिया था.

19 साल की उम्र में उन्हें मेसोपोटामिया भेजा गया था जो अब इराक़ में है. इस लड़ाई में राष्ट्रमंडल के चार लाख दस हज़ार सैनिकों ने भाग लिया था, जिनमें से 92000 सैनिक मारे गए थे.

1939 में भी उन्हें विमान भेदी तोपची के रूप में सबसे पहले तलब किया गया था.

1944 में अपर स्लॉटर को ज़बरदस्त हवाई हमले का सामना करना पड़ा था. टोनी उस समय 14 साल के थे और अपनी बहन के साथ एक कमरे में रहते थे.

वे याद करते हैं, "जैसे ही बमबारी शुरू हुई, हमने अपने आप को कंबलों में छुपा लिया. जब हम बाहर आए तो चारों तरफ़ आग लगी हुई थी. सुबह के साढ़े पाँच बजे हुए थे. लेकिन गाँव के लोग पानी और मिट्टी से आग बुझाने में लगे हुए थे."

इस हवाई हमले में गाँव का काफ़ी नुक़सान हुआ था, लेकिन मरा कोई नहीं था.