मारियो मोंटी होंगे इटली के नए प्रधानमंत्री

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Image caption माना जा रहा है कि अर्थशास्त्री की तरह मारियो मोंटी के अनुभव का लाभ मिलेगा

इतालवी अर्थशास्त्री और यूरोपीय आयोग के पूर्व कमिश्नर मारियो मोंटी को इटली के कार्यवाहक प्रधानमंत्री की तरह नई सरकार का गठन करने को कहा गया है.

राष्ट्रपति जॉर्जियो नैपोलिटैनो के साथ उनकी और दूसरे राजनीतिक नेताओं की 17 बैठकों के बाद ये फ़ैसला लिया गया है.

उन पर इटली के कर्ज़ संकट से उबरने के लिए संसद की ओर से पारित किए गए कटौती प्रस्तावों को लागू करने की अहम ज़िम्मेदारी होगी.

शनिवार को निचले सदन में इन प्रस्तावों के पारित होने के बाद अपने वादे के अनुसार सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

माना जा रहा है कि मारियो मोंटी को अपने मंत्रिमंडल का गठन करने में कई दिन लग सकते हैं.

चुनौती

कार्यवाहक प्रधानमंत्री की तरह मारियो मोंटी की पहली प्राथमिकता और चुनौती सरकारी ख़र्चों में कटौती के प्रस्तावों को अमल में लाना होगा.

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Image caption मोंटी की नियुक्ति का देश के भीतर विरोध भी हुआ है

हालांकि उन्हें सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन देने का वादा किया है लेकिन उन्हें इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए संसद में साधारण बहुमत की आवश्यकता होगी.

कटौती प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार कटौतियों और टैक्स बढ़ाकर कुल 59.8 अरब यूरो की बचत करेगी जिसका लक्ष्य वर्ष 2014 तक बजट को संतुलित करना होगा.

इस समय यूरोप की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था इटली संकट में है और इन प्रस्तावों के संसद में पारित होने से पहले यानी गुरुवार को दस साल के सरकारी बॉन्ड पर निवेशक सात प्रतिशत तक का ब्याज मांग रहे थे.

ये वही स्थिति है जिसमें यूरोज़ोन के नेताओं ने ग्रीस, आयरलैंड और पुर्तगाल को बाध्य कर दिया था कि वे यूरोज़ोन की ओर से राहत पैकेज स्वीकार कर लें.

इस समय इटली का कर्ज़ उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 120 प्रतिशत तक जा पहुँचा है और पिछले 15 वर्षों से देश की अर्थव्यवस्था के विकास की दर सिर्फ़ 0.75 प्रतिशत रही है.

रोम में बीबीसी संवाददाता एलेन जॉन्सटन का कहना है कि मारियो मोंटी ठीक उसी तरह के व्यक्ति हैं जैसा कि बाज़ार चाहेगा कि वह देश का बागडोर संभाले.

लेकिन उनका कहना है कि उनका देश के भीतर ही बड़ा विरोध हुआ है और दूसरे लोगों को लगता है कि इटली की समस्या इतनी गंभीर है कि सिर्फ़ सरकार के बदलने से जल्दी कोई बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा, ऐसा नहीं लगता.

बर्लुस्कोनी की भूमिका

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Image caption 17 साल के राजनीतिक दबदबे के बाद बर्लुस्कोनी पिछले कुछ समय से काफ़ी विवादों में रहे

संसद में बहुमत हारने के बाद सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने वादा किया था कि यदि संसद के दोनों सदनों में कटौती प्रस्ताव पारित हो जाता है तो वे इस्तीफ़ा दे देंगे.

शनिवार को जब बर्लुस्कोनी अपना इस्तीफ़ा देने राष्ट्रपति भवन जा रहे थे तो बाहर खड़े लोगों ने उनके ख़िलाफ़ नारे लगाए थे और उनके लिए बहुत से अपशब्दों का प्रयोग किया था.

उनकी पीपल ऑफ़ फ़्रीडम पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य एंजेलिनो एल्फ़ांसो ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात के बाद कहा है कि उनकी पार्टी मारियो मोंटी की सरकार को समर्थन देने को तैयार है लेकिन ये सरकार और उसकी नीतियों पर निर्भर करेगा.

उन्होंने कहा कि जो राजनीतिज्ञ बर्लुस्कोनी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध करने में सक्रिय थे, उन्हें सरकार में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

माना जा रहा है कि संसद में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बर्लुस्कोनी चाहेंगे कि उनकी सरकार के कुछ सहयोगियों को नई सरकार में भी जगह मिल जाए.

वैसे टेलीविज़न पर दिए एक साक्षात्कार में बर्लुस्कोनी ने कहा है कि इटली के आधुनिकीकरण के लिए वे संसद में भरपूर प्रयास करेंगे.

लेकिन उनके गठबंधन में शामिल नॉर्दन लीग ने कहा है कि वह देश में जल्दी चुनाव चाहती है और वह मोंटी की सरकार को समर्थन नहीं देगी.

वैसे सभी मध्यमार्गी और मध्य-वाममार्गी पार्टियों ने मोंटी की सरकार को समर्थन देने का वादा किया है.

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