पुतिन को पुरस्कार देने पर विवाद

 बुधवार, 16 नवंबर, 2011 को 19:06 IST तक के समाचार
रूसी प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन

सरकार के विरोध के बावजूद आयोजक व्लादिमीर पुतिन को कंफ़्यूशियस शांति पुरस्कार देने पर ज़ोर दे रहे हैं

कंफ़्यूशियस शांति पुरस्कार के आयोजकों का कहना है कि चीन सरकार के विरोध के बावजूद वे रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन को ये पुरस्कार ज़रूर देंगे.

कंफ़्यूशियस शांति पुरस्कार को चीन का नोबल शांति पुरस्कार माना जाता है. चीन के संस्कृति मंत्रालय ने सितंबर में घोषणा की थी कि इस साल ये पुरस्कार नहीं दिया जाएगा और पुरस्कार समिति को भंग कर दिया था.

लेकिन समिति के सदस्य और कवि कियाओ दामो का कहना है कि उन्होंने एक नए पैनल का गठन किया है. उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि पुरस्कार वितरण समारोह ज़रूर होगा.

उन्होंने कहा कि पुतिन को लीबिया पर नेटो की बमबारी के विरोध की वजह से चुना गया है. कियाओ दामो ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "पुतिन को शांति पुरस्कार इसलिए दिया गया है, क्योंकि विश्व शांति को बनाए रखने के लिए इस साल उनका काम वाकई बेहतरीन रहा है."

कियाओ के नए पैनल के एक कथित वक्तव्य में व्लादिमीर पुतिन के 1999 में चेचन्या में युद्ध के क़दम को भी सराहा गया है.

वक्तव्य में कहा गया है, "इस युद्ध में दिखी उनकी दृढ़ता ने कई रूसियों को प्रभावित किया. लोगों को लगा कि वे रूस में सुरक्षा और स्थिरता लाने में सक्षम हैं."

ये अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि पुतिन इस पुरस्कार के बारे में जानते हैं या नहीं.

कंफ़्यूशियस पुरस्कार

कंफ़्यूशियस शांति पुरस्कार पिछले साल स्थापित हुआ जब चीनी प्रशासन का विरोध कर रहे लू श्याबाओ को नोबल समिति की ओर से शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी. माना जा रहा था कि कंफ़्यूशियस पुरस्कार को चीनी प्रशासन का समर्थन प्राप्त है.


"पुतिन को शांति पुरस्कार इसलिए दिया गया है क्योंकि विश्व शांति को बनाए रखने के लिए इस साल उनका काम वाकई बेहतरीन रहा है."

कियाओ दामो, कंफ्यूशियस शांति पुरस्कार समिति सदस्य

लू श्याबाओ 2008 से जेल में बंद हैं और उन्हें नोबल पुरस्कार देने के फ़ैसले से चीन ख़ुश नहीं था. पिछले साल कंफ़्यूशियस शांति पुरस्कार ताइवान के राजनीतिज्ञ लियेन चान को दिया गया था.

लेकिन ये स्पष्ट नहीं हो सका था कि वे इस बारे में जानते थे या नहीं और चान समारोह में नहीं पहुंचे थे. उनकी जगह एक छोटी लड़की को ये पुरस्कार दिया गया था हालांकि आयजकों ने ये बताने से इनकार कर दिया था कि वो लड़की कौन है या उसे क्यों चुना गया.

इस साल संस्कृति मंत्रालय की ओर से इस पुरस्कार को नहीं दिए जाने की घोषणा के बाद कियाओ दामो ने हांगकांग में चायना इंटरनेशनल पीस स्टडीज़ सेंटर के नाम से एक संगठन स्थापित किया. उनका कहना है कि इस संगठन में कलाकार और बुद्धिजीवी हैं और इसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है.

कियाओ ने कहा है कि पुरस्कार वितरण समारोह नोबल समारोह से एक दिन पहले, नौ दिसंबर, को होगा.

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