ऑस्ट्रेलिया से सैन्य संबंध, चीन ने उठाए सवाल

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Image caption अमरीका ऑस्ट्रेलिया में अपनी सैन्य मौजूदगी मज़बूत करेगा.

चीन की बढ़ती ताक़त की चिंताओं के बीच अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीका ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने सैन्य संबंध मज़बूत करेगा.

सैनिकों की पहली खेप में अगले साल लगभग 250 अमरीकी मरीन ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे.

ओबामा ने ये बात बुधवार को अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान कही. उन्होंने ये भी कहा कि इस गठबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी वे गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया की संसद में अपने भाषण में देंगे.

ऑस्ट्रेलिया में अमरीकी सैन्य मौजूदगी को चीन के बढ़ते प्रभाव के तोड़ के रूप में देखा जा रहा है.

लेकिन ओबामा का कहना था कि अमरीका पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी वचनबद्धता बढ़ा रहा है, जिसमें चीन भी शामिल है.

ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जुलिया गिलार्ड के साथ एक साझा पत्रकार सम्मेलन में ओबामा ने कहा, “हम एक समृद्ध और शांति प्रिय चीन का स्वागत करते हैं. मैंने न सिर्फ़ सार्वजनिक बल्कि निजी तौर पर भी चीन को ये संदेश दिया है कि इस बढ़ती ताक़त और समृद्धि के साथ ही उसकी ज़िम्मेदारी भी बढ़ी है.”

उधर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियू वेईमिन ने अमरीकी क़दम पर सवाल उठाया है. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक वेईमिन ने कहा, “सैन्य गठबंधनों को बढ़ाना सही क़दम नहीं माना जा सकता और ये इस क्षेत्र के देशों के हित में नहीं है.”

सैन्य सहयोग

अमरीकी राष्ट्रपति की ऑस्ट्रेलिया यात्रा ऐसे समय में आई है जब दोंनो देशों के सैन्य गठबंधन के 60 साल पूरे हुए हैं.

जुलिया गिलार्ड का कहना था कि अगले साल से लगभग 250 अमरीकी मरीन सैनिकों की बारी-बारी से उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में तैनाती होगी और धीरे-धीरे 2500 अमरीकी सैन्य कर्मचारियों की वहां तैनाती होगी.

इससे पहले राष्ट्रपति ओबामा ने दो बार मार्च 2010 और जून 2010 में अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा रद्द की थी. ऑस्ट्रेलिया के बाद वे एशियाई नेताओं की एक शिखर वार्ता के लिए इंडोनेशिया जाएंगे.

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