परमाणु दायित्व: 'भारतीय क़ानून के तहत शिकायतों का हल'

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Image caption मनमोहन ने कहा कि दोनों देशों की बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय मुद्दों में कोई अड़चन नहीं

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि परमाणु दायित्व के मुद्दे पर भारत ने कुछ हद तक अमरीकी कंपनियों के चिंताओं को हल करने करने की कोशिश की है और भारतीय क़ानून की चार-दिवारी के बीच किसी भी ख़ास शिकायत के समाधान के लिए तैयार है.

दक्षिण पूर्वी एशियाई सहयोग संगठन (आसियान) की बैठक में भाग लेने गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति के साथ बाली में मुलाकात के बाद ये विचार व्यक्त किए.

मनमोहन सिंह ने चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से भी बातचीत की है और इसके बाद वेन जियाबाओ ने कहा कि ऐसे कई क्षेत्र है जिनमें भारत और चीन सहयोग बढ़ा सकते हैं.

'द्विपक्षीय, क्षेत्रीय सहयोग में अड़चन नहीं'

भारत और अमरीका के बीच वर्ष 2008 के ऐतिहासिक असैनिक परमाणु सहयोग समझौते के बाद से परमाणु सहयोग के मुद्दे पर भारत का परमाणु दायित्व क़ानून विवाद कि विषय रहा है.

भारत में कई विपक्षी दलों ने परमाणु दायित्व के विषय पर मुआवज़े की हद को 1500 करोड़ रुपए रखने को अपर्याप्त बताया है.

अमरीका की चिंता है कि कुछ अन्य प्रावधानों के कारण किसी तरह का हादसा होने की स्थिति में परमाणु सामग्री उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के ख़िलाफ़ भी हर्जाने की याचिका दायर हो सकती है.

मनमोहन सिंह ने बाली में कहा, "मैंने उन्हें (बराक ओबामा को) बताया है कि इस विषय में हमारा एक क़ानून है. इसके नियम बन गए हैं और तीस दिन तक संसद के समक्ष रहेंगे, इसलिए अमरीकी कंपनियों की चिंताओं का समाधान करने के बारे में हमने कुछ क़दम उठाए हैं. अपने क़ानून की चार-दिवारी के बीच हम ख़ास शिकायतों का भी समाधान कर सकते हैं."

मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साथ-साथ काम करने के विषय में कोई बड़ी अड़चन नहीं है.

उधर चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के साथ प्रधामंत्री मनमोहन सिंह की बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने कि ये दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाएँ.

मनमोहन सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर भारत और चीन ने पहले भी सहयोग किया है और जियाबाओ ने कहा कि विश्व में भारत और चीन दोनों के विकास के लिए काफ़ी जगह है.

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