सू ची की पार्टी चुनाव लड़ेगी

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Image caption इस सोमवार को ही सू ची की रिहाई के एक बरस पूरे हुए हैं

बर्मा में लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची के नेतृत्व वाले विपक्षी राजनीतिक दल ने एक बार फिर अपनी पार्टी को एक वैधानिक राजनीतिक दल की तरह पंजीकृत करवाने का निर्णय लिया है.

ऐसा करने के बाद ही उनकी पार्टी अगले चुनावों में हिस्सा ले सकेगी.

अमरीकी विदेश मंत्री की अगले महीने बर्मा यात्रा की घोषणा के बाद ये निर्णय सार्वजनिक किया गया है.

पिछले 50 वर्षों में किसी अमरीकी विदेश मंत्री की ये पहली बर्मा यात्रा होगी.

इन दोनों घोषणाओं को बर्मा की आंशिक लोकतांत्रिक सरकार की ओर से राजनीतिक सुधार की ओर उठाए जा रहे क़दमों के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है.

सू ची भी लड़ेंगीं

एक साल पहले बर्मा में हुए चुनावों को धोखा क़रार देते हुए आंग सान सू ची और उनकी राजनीतिक पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने इसका बहिष्कार कर दिया था.

बर्मा में ये चुनाव 20 साल बाद हुए थे लेकिन सैन्य सरकार ने सू ची को चुनाव लड़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

लेकिन अब वह आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव में भाग लेने की स्थिति में हैं.

आंग सान सू ची ने रंगून में एनएलडी के सौ वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद अगला चुनाव लड़ने की घोषणा की है.

पार्टी के एक बयान में कहा गया है, "हमने सर्वसम्मति से फ़ैसला किया है कि एनएलडी क़ानून के अनुसार अपना पंजीकरण करवाएगी और हम आगामी उपचुनाव में हिस्सा लेंगे."

48 सदस्यों के मंत्री बन जाने के बाद संसद के ये पद रिक्त हैं.

आंग सान सू ची ने बीबीसी से कहा है वे इनमें से एक सीट से चुनाव लड़ेंगीं.

हालांकि वर्ष 1990 में भी उनकी पार्टी एनएलडी ने चुनाव जीता था लेकिन उन्हें सत्ता में आने की कभी अनुमति नहीं दी गई.

इसके बाद कई बरसों तक आंग सान सू ची नज़रबंद रहीं.

एक साल पहले ही उन्हें रिहा किया गया और इसके बाद नई सरकार ने उनसे चर्चा शुरु की.

इसका प्रतिफल ये हुआ है कि सारे राजनीतिक क़ैदियों को तो नहीं लेकिन कुछ राजनीतिक क़ैदियों को रिहा कर दिया गया है.

अमरीकी रूख़

इसी समय हिलेरी क्लिंटन की बर्मा यात्रा की घोषणा हुई है.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा है कि विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को बर्मा भेजने की घोषणा करने से पहले उन्होंने आंग सान सू ची से चर्चा की थी.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "अपनी यात्रा के दौरान हिलेरी क्लिंटन इस संभावना का पता लगाएँगीं कि वहाँ हो रहे परिवर्तनों को अमरीका किस तरह से मज़बूती प्रदान कर सकता है."

उन्होंने कहा, "अमरीकी सहयोग की संभावना बर्मा सरकार की ओर से और ठोस क़दम उठाए जाने पर निर्भर करेगी. यदि वह सुधार की दिशा में और क़दम उठाने में विफल रहती है तो बर्मा पर लगाए गए प्रतिबंध जारी रहेंगे और वह अलग-थलग ही रहेगा."

उल्लेखनीय है कि अमरीका ने बर्मा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं और अपने नागरिकों को बर्मा की यात्रा न करने की हिदायत दे रखी है.

अमरीका की ये घोषणा आसियान देशों के नेताओं की उस घोषणा के एक दिन बाद आई है जिसमें कहा गया था कि बर्मा 2014 में आसियान की अध्यक्षता कर सकता है.

इससे पहले एक बार और बर्मा के पास अध्यक्षता का अवसर आया था लेकिन मानवाधिकार पर उसके रिकॉर्ड को देखते हुए उसे पद नहीं संभालने दिया गया था.

बीबीसी की दक्षिण पूर्वी एशिया संवाददाता रैचेल हार्वी का कहना है कि आंग सान सू ची की घोषणा और हिलेरी क्लिंटन की अगले महीने होने वाली यात्रा को बर्मा में हुए राजनीतिक सुधारों की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है.

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