बड़ा प्रभाव था सैफ अल-इस्लाम का

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Image caption मुआमार गद्दाफ़ी के नौ बच्चों में से दूसरे नंबर पर जन्मे सैफ ने बागि़यों से लड़ने का संकल्प लेने वाले कई भाषण भी दिए और उन्हें 'शराबी', 'ठग' और 'आंतकवादी' तक कहा.

कोई भी अधिकारिक पद पर न होते हुए भी सैफ अल-इस्लाम गद्दाफ़ी देश में अपने पिता के बाद दूसरे सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर देखे जाते थे.

लेकिन अब अंतराष्ट्रीय आपराधिक अदालत को उनकी तलाश है और उनके पर विरोधियों के आंदोलन के दमन के दौरान मानवता के ख़िलाफ़ अपराध करने के आरोप हैं.

बग़ावत और उस पर सरकार के जवाब से पहले तक अंग्रेज़ी बोलने वाले इस सैफ़ को लीबिया की सरकार का सुधारवादी चेहरा माना जाता था.

मुआमार गद्दाफ़ी के नौ बच्चों में से दूसरे नंबर पर जन्मे सैफ़ ने बाग़ियों से लड़ने का संकल्प लेने वाले कई भाषण भी दिए और उन्हें 'शराबी', 'ठग' और 'आंतकवादी' तक कहा.

टीवी पर दिखाए गए एक भाषण में उन्होंने कहा, ''हम अपनी धरती पर और अपने देश में हैं. हम उनसे छह महीनों या एक साल या दो सालों तक लड़ेंगे... और जीतेंगे.''

बाग़ियों ने उन्हें क़ब्ज़े में लेने का दावा किया था और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत ने उन पर मुक़दमा चलाए जाने की बात की थी.

जीत के प्रति आश्वस्त

लेकिन फिर वह त्रिपोली के एक होटल के बाहर पहुंच गए जहां अंतराष्ट्रीय पत्रकार भी ठहरे थे और वहां जमा भीड़ से मिलने जुलने लगे.

तब भी वह यह कहते हुए जीत के प्रति आश्वस्त नज़र आ रहे थे कि उनके पिता के प्रति वफादार सैनिकों ने बाग़ियों को खदेड़ दिया है.

उन्होंने कहा, ''हमने बाग़ियों की कमर तोड़ दी है. वो एक जाल था. हमने उन्हें मुश्किल में डाले रखा. इसलिए हम जीत रहे हैं.''

यह साफ़ नहीं है कि क्या उन्हें पकड़ा गया था या वो बच निकलने में कामयाब हो गए थे. या फिर वो दावे सच ही नहीं थे.

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