हक़्क़ानी का 'शायराना' बचाव

हुसैन हक़्क़ानी (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption अपने दिल की बात कहने के लिए शायरों को याद किया

अमरीकी सरकार को विवादास्पद ज्ञापन सौंपने के मामले में अपनी सफ़ाई देने के लिए इस्लामाबाद तलब किए गए अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने ग़ज़लों और कविताओं का सहारा लिया है.

पाकिस्तान की धरती पर क़दम रखने से पहले हुसैन हक्क़ानी ने सामाजकि नेटवर्किगं साइट ट्वीटर पर ऊर्दु के जाने माने शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की कुछ पंक्तियां लिखी.

रविवार की सुबह पाकिस्तानी समयानुसार सुबह पौने सात बजे हक़्क़ानी ने ट्वीटर पर लिखा,

''जुनु में जैसी भी गुज़री, बेकार गुज़री है

अगरचे दिल पे ख़राबी हज़ार गुज़री है.''

ये पंक्तियां फ़ैज़ की एक मशहूर ग़ज़ल का हिस्सा हैं.

थोड़ी ही देर बाद ट्वीटर पर उन्होंने फिर लिखा,

''मिट्टी की मोहब्बत में हम आशुफ़्ता सरों ने,

वो क़र्ज़ उतारे हैं जो वाजिब भी नहीं थे''

ट्वीटर पर उनको फ़ौलो करने वाले उनके साथ सवाल-जवाब भी कर रहे थे.

सवाल-जवाब

एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, ''क्या ये सच है कि हुसैन हक़्क़ानी ने वर्ष 2000 में पाकिस्तानी समाचार पत्र द न्यूज़ में एक कॉलम लिखा था जिसमें उन्होंने चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा (चरमपंथी संगठन) से कहा था कि वो बंगलौर(दक्षिणी भारत का एक शहर) के आईटी सेक्टर पर हमला करे.''

हुसैन हक़्कानी ने इसके जवाब में मुस्कुराते चेहरे वाले प्रतीक के साथ लिखा, ''जी हां मैने सिर्फ़ ये सवाल उठाया था कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो इसका परिणाम क्या होगा.''

एक और व्यक्ति उमर तारिक़ ने बहुत ही भावुक अंदाज़ में लिखा, मैं उम्मीद करता हूं कि सेना का कोई जनरल भी किसी दिन टीवी पर आकर रोए और नागरिक क़ब्रिस्तान में दफ़न किए गए अपने रिश्तेदारों का ज़िक्र करके अपनी देश भक्ति का सबूत देगा.

हक़्क़ानी ने इसको पसंद करते हुए इसे रीट्वीट कर दिया है.

हक़्क़ानी के इन संदेशों से साफ़ ज़ाहिर है कि उन्हें अपने ऊपर लगाए जाने वाले आरोपों और उनकी सफ़ाई के लिए इस्लामाबाद बुलाए जाने पर काफ़ी शिकायत है.

ट्वीटर पर लिखे गए उनके संदेशों से ये तो नहीं पता चलता कि उनकी शिकायत किससे हैं लेकिन इतना ज़रूर है कि उन पक्तियों के ज़रिए उन्होंने अपने दिल की बात कहने की कोशिश की है.

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