अरब लीग ने सीरियाई प्रस्ताव ठुकराया

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Image caption प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हिंसक दमन अब भी जारी है

अरब लीग ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के प्रस्तावों को ठुकरा दिया है, सीरियाई राष्ट्रपति ने अरब लीग से कहा था कि वह 500 पर्यवेक्षकों को सीरिया भेजने के अपनी माँग में बदलाव करे.

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति असद पर्यवेक्षकों की संख्या को 500 से घटाकर 40 करने को कह रहे थे जिसके लिए अरब लीग तैयार नहीं हुआ.

अरब लीग ने सीरिया को हिंसा रोकने के लिए तीन दिन की मोहलत दी थी जो पिछली रात समाप्त हो गई.

सीरिया को अरब लीग की सदस्यता से पहले ही निलंबित किया जा चुका है और अब कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारियाँ चल रही हैं. इस मामले पर आगे विचार करने के लिए अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक काहिरा में गुरुवार को होने वाली है.

सीरिया में इस वर्ष मार्च महीने से अब तक साढ़े तीन हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. राष्ट्रपित बशर अल असद ने कहा है कि वे दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं, उन्होंने भविष्यवाणी की है कि मौजूदा परिस्थितियों में संघर्ष जारी रहने वाला है.

ब्रितानी अख़बार संडे टाइम्स के साथ बातचीत में असद ने कहा कि अगर सीरिया पर इसी तरह दबाव जारी रहेगा तो संघर्ष भी चलता रहेगा.

बशर अल असद ने चेतावनी दी है कि अगर बाहरी शक्तियों ने सैनिक हस्तक्षेप करने की कोशिश की तो परिणाम बहुत भयंकर होंगे.

संभावना धूमिल

बीबीसी संवाददाता जिम म्योर का कहना है कि अरब लीग की शांति योजना को सीरिया में हिंसा समाप्त कराने की एकमात्र व्यावहारिक उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा था लेकिन अब उस पर अमल होने के आसार धूमिल पड़ गए हैं.

अरब लीग ने 500 पर्यवेक्षकों को सीरिया भेजने के अलावा चार प्रमुख माँगें की थीं, प्रदर्शनकारियों का हिंसक दमन बंद हो, विदेशी पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता हो, प्रदर्शनकारियों को जेल से रिहा किया जाए और विपक्षी शक्तियों के साथ दो सप्ताह के भीतर बातचीत शुरू हो.

लगभग एक पखवाड़े पहले ही सीरिया ने अरब लीग के शांति प्रस्तावों को मान लिया था लेकिन उस पर कोई अमल नहीं किया गया, बल्कि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अरब लीग के शांति प्रस्ताव पर सहमति प्रकट करने के बाद होम्स में सीरियाई सैनिकों ने दमन और बढ़ा दिया.

विश्लेषकों का कहना है कि सीरिया अरब लीग के शांति प्रस्ताव को स्वीकार करके व्यापक अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करना चाहता है मगर वह शांति प्रयासों पर अमल करने से पहले प्रदर्शनकारियों को जितना हो सके कमज़ोर कर देना चाहता है.

देश में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, रूस और अमरीका पहले ही आगाह कर चुके हैं कि सीरिया गृह युद्ध की ओर बढ़ रहा है.

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