प्रदर्शनकारियों के आगे झुके सैनिक शासक

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Image caption काहिरा के तहरीर चौक पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हैं

मिस्र के सैनिक शासक राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया तेज़ करने पर सहमत हो गए हैं. पिछले कुछ दिनों से काहिरा के तहरीर चौक पर प्रदर्शन कर रहे लोगों की ये प्रमुख मांग थी.

सेना की सुप्रीम काउंसिल के प्रमुख फ़ील्ड मार्शल मोहम्मद हुसैन तंतावी ने राष्ट्रीय टेलीविज़न पर दिए अपने संबोधन में कहा कि अगले साल जुलाई तक राष्ट्रपति चुनाव करा लिए जाएँगे.

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कैबिनेट का इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लिया है और संसदीय चुनाव अगले सप्ताह तय कार्यक्रम के मुताबिक़ ही होंगे.

पिछले कई दिनों से प्रदर्शनकारी काहिरा के मशहूर तहरीर चौक पर इकट्ठा हुए हैं. वे सुधारों की गति को लेकर नाराज़ हैं. मंगलवार को भी हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी वहाँ पहुँचे.

मांग

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रदर्शनकारी सेना की ओर से रियायतों की घोषणा से संतुष्ट नज़र नहीं आते.

प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे हैं कि वे तहरीर चौक से नहीं जाएँगे. वे तंतावी के त्यागपत्र की मांग कर रहे हैं.

अपने संबोधन में तंतावी ने कहा कि सेना सिर्फ़ लोगों की सुरक्षा के लिए है और वो स्थायी सत्ता नहीं चाहती.

उन्होंने कहा, "सेना की सुप्रीम काउंसिल शासन करना नहीं चाहती. उसके लिए देशहित सर्वोपरि है."

पिछले कुछ दिनों से तहरीर चौक पर हिंसक प्रदर्शन हुए हैं. इन प्रदर्शनों की गंभीरता को देखते हुए एक आपात बैठक हुई है. इस बैठक में सैनिक शासन के प्रतिनिधि और राजनीतिक गुटों के लोग शामिल हुए.

क़दम

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Image caption तंतावी ने कहा कि सेना सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए है

फरवरी में होस्नी मुबारक ने राष्ट्रपति का पद छोड़ दिया था. अगले सप्ताह होने वाले संसदीय चुनाव देश को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रास्ते पर लाने की दिशा में एक अहम क़दम है.

लेकिन मिस्र के लोगों को आशंका है कि सेना सत्ता अपने हाथ में रखना चाहती है, भले ही चुनाव का नतीजा कुछ भी हो.

काहिरा में बीबीसी संवाददाता केविन कोनोली का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए सहमत होना सेना की ओर से एक बड़ी रियायत मानी जा रही है.

बातचीत में हिस्सा लेने वाला सलीमा अल आवा ने समाचार एजेंसी मीना को बताया कि नई सरकार 'क्रांति के सभी लक्ष्यों' को लागू करेगी.

तीन दिनों के हिंसक प्रदर्शन के बाद सेना की ओर से नियुक्त नागरिक सरकार ने प्रधानमंत्री एसाम शराफ़ की अगुआई में इस्तीफ़ा दे दिया था.

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