2जी घोटाला: पाँच अधिकारियों को ज़मानत

सुप्रीम कोर्ट
Image caption इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजा और कनिमोड़ी को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले के पाँच अभियुक्तों को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ज़मानत दे दी है.

ये पाँचों विभिन्न कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी हैं.

जिन अधिकारियों को ज़मानत दी गई है उनमें यूनिटेक वायरलेस के संजय चंद्रा, डीबी रियलिटी के विनोद गोयनका और रिलायंस समूह के गौतम दोशी, सुरेंद्र पिपारा और हरि नायर हैं.

सीबीआई ने इन्हें ज़मानत दिए जाने का विरोध किया था और कहा था कि उन्हें ज़मानत के लिए निचली अदालत में जाना चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की आपत्तियों को ख़ारिज कर दिया.

इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोड़ी भी अभियुक्त हैं और तिहाड़ जेल में बंद हैं. इन दोनों को भी अभी तक ज़मानत नहीं मिल सकी है.

फ़ैसला

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एचएल दत्तू ने इन अधिकारियों की ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई की.

ये पाँचों अभियुक्त निचली अदालत और हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे, क्योंकि इन दोनों ही अदालतों ने उनकी ज़मानत याचिका रद्द कर दी थी.

इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तरह आरोप लगाए गए हैं.

सीबीआई ने उनकी ज़मानत याचिका का विरोध किया था.

लेकिन अभियुक्तों का कहना था कि चूंकि उनके ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल किया जा चुका है और वे सबूतों से छेड़छाड़ की स्थिति में नहीं है इसलिए उन्हें ज़मानत दी जानी चाहिए.

अन्य अभियुक्त

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Image caption राजा के कार्यकाल में ही 2जी स्पेट्रम का आवंटन हुआ था

इस मामले में ए राजा और कनिमोड़ी के अलावा पूर्व संचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आरके चंदोलिया हैं.

पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन को भी अभियुक्त बनाया गया है और हाल ही में सीबीआई ने प्रमोद महाजन के कार्यकाल के अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया है.

स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा, उनका चचेरा भाई आसिफ़ बलवा और उनका एक सहयोगी राजीव अग्रवाल को भी अभियुक्त बनाकर गिरफ़्तार किया गया है.

अभियुक्तों में तीन कंपनियों का नाम है रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, स्वान टेलीकॉम और यूनीटेक वायरलेस लिमिटेड.

इन्हीं तीन कंपनियों के अधिकारियों को ज़मानत दी गई है.

इन सभी पर आरोप है कि इन लोगों और कंपनियों ने मिलकर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाला किया जिससे सरकार को भारी राजस्व का नुक़सान हुआ.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनुसार ये नुक़सान 1.76 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुक़सान हुआ.

हालांकि सभी अभियुक्तों का कहना रहा है कि उन्होंने नियमानुसार ही कार्य किया और इसमें किसी तरह का घोटाला नहीं किया गया है.

ये मामला सीबीआई के अलावा, संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भी है.

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