दो जनरलों ने माफ़ी मांगी, कहा - 'तुलना मुबारक से न करें'

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Image caption मिस्र में पिछले छह दिन के प्रदर्शनों में कम से कम 30 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं

मिस्र में सेना के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों के बीच सेना के दो सबसे वरिष्ठ जनरलों ने काहिरा और अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए माफ़ी मांगी है.

मिस्र में हाल के प्रदर्शनों के शुरु होने के बाद ये पहला मौक़ा है कि मिस्र के सैन्य शासन ने माफ़ी मांगी है. पिछले छह दिन के प्रदर्शनों में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं और अनेक घायल हुए हैं.

देश में इस साल की शुरुआत में दशकों से सत्ता में बने हुए होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरु हुए थे.

प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम की जाए और होस्नी मुबारक अपने पद से इस्तीफ़ा दें. फ़रवरी में कई हफ़्तों के प्रदर्शनों के बाद होस्नी मुबारक ने सत्ता छोड़ दी थी और अब उनके ख़िलाफ़ अभियोग चलाया जा रहा है.

इसके बाद मिस्र में सैन्य परिषद ने सत्ता संभाल ली थी. लेकिन पिछले कुछ दिनों में सेना के ख़िलाफ़ भी प्रदर्शन शुरु हो गए और प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सेना तत्काल सत्ता छोड़े और आम चुनावों के बाद राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराए जाएँ.

समय पर चुनाव

बुधवार देर रात सैन्य परिषद के दो जनरलों ने टीवी पर एक संदेश दिया. उनमें से एक मेजर जनरल मुहम्मद अल-असर ने पूरी फौज की तरफ़ से पश्चाताप जताया और माफ़ी मांगी.

उन्होंने कहा, "जो हुआ उसे देखकर हमारा दिलों से खून बहने लगता है. हम उम्मीद करते हैं कि ये संकट खत्म होगा और उपरवाले की मर्जी से दुबारा फिर ऐसा नहीं होगा".

मिस्र की सेना की सर्वोच्च परिषद ने कहा - 'हमे मिस्र के इन बेटों की मौत पर दुख है.'

वहीं सैन्य परिषद के के सदस्य जनरल मोख्तार अल मोल्ला ने कहा कि मिस्र में चुनाव समय पर ही होंगे. ये चुनाव सोमवार से शुरु होने वाले हैं. इससे पहले अटकलें लगाई जा रही थी कि मौजूदा तनाव को देखते हुए ये चुनाव स्थगित कर दिए जाएंगे.

'हमारी तुलना होस्नी मुबारक से न करें'

काहिरा में बीबीसी संवाददाता जॉन लेन बताते हैं कि इस टीवी संदेश में जनरलों का अंदाज़ बदला हुआ था और मंगलवार को फ़ील्ड मार्शल तंतावी के टकराव वाले अंदाज़ के संदेश से बिल्कुल अलग था.

उन्होंने मिस्र की जनता से अपील की कि वो इस सैन्य शासन की तुलना होस्नी मुबारक के शासन से ना करें.

एक जनरल ने कहा, "हम बिल्कुल अलग हैं. हमें सत्ता का शौक नहीं है और हम सत्ता में बने नहीं रहना चाहते."

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों की हिंसा के बाद मंगलवार रात से तहरीर चौक के आसपास हिंसा थमी हुई है. लेकिन हज़ारों प्रदर्शनकारी अब भी सड़कों पर हैं और फ़िलहाल स्पष्ट नहीं है कि इस माफ़ी से उनके रुख़ में कोई बदलाव आएगा या नहीं.

काहिरा में बीबीसी संवाददाता जेरेमी बोवेन के मुताबिक चुनाव पर आम राय अभी विभाजित है. कुछ लोग चाहते हैं कि चुनाव समय पर हों जबकि दूसरे लोगों का मानना है कि सबसे पहले सेना को सत्ता छोड़नी होगी.

इससे पहले बुधवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था की अध्यक्ष नवी पिल्लई ने मिस्र में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग को 'ज़रूरत से अधिक' हिंसा की संज्ञा दी और इसे बंद कर हिंसक घटनाओं की स्वतंत्र जाँच का आहवान किया.

ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने भी उन रिपोर्टों पर चिंता जताई थी जिनमें कहा गया था कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ 'ख़तरनाक़ तरह की गैस का इस्तेमाल किया गया है.'

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