आर्थिक प्रतिबंध पर सीरिया के तेवर तल्ख़

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Image caption सीरिया के पड़ोसी देश इराक और लेबनान पहले ही कह चुके है कि वह सीरिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के खिलाफ़ है.

सीरिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने पर फ़ैसले के लिए अरब लीग संबंधित देशों के विदेश मंत्रियों की रविवार को होने वाली बैठक में मतदान किया जाएगा.

अरब लीग के शांति प्रस्ताव पर तय समयसीमा में अमल नही कर पाने के कारण सीरिया को पहले ही अरब लीग से निकाल दिया गया है.

अरब लीग से संबंधित देशों के वित्त मंत्री सीरिया पर आर्थिक प्रतिबंधों की रूपरेखा तैयार कर चुके है और रविवार को होने वाली बैठक में इसे मंज़ूरी भी दे दी जाएगी.

प्रतिबंधों में सीरिया और दूसरे अरब लीग देशों के बीच व्यवसायिक उड़ाने बंद किए जाने और अरब देशों में मौजूद सीरिया की संपत्तियों को ज़ब्त किया जाना शामिल है.

प्रतिबंध

हालाँकि आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने से पहले ही सीरिया ने अपने कड़े तेवर स्पष्ट कर दिए है.

सीरिया के विदेश मंत्री वालिद अल-मुअल्लिम ने एक पत्र लिखकर अरब लीग पर आरोप लगाया है कि वह सीरिया का मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुँचाकर ‘गै़रज़रूरी’ बाहरी हस्तक्षेप को बुलावा दे रहा है.

सीरिया की सरकारी टीवी चैनल ने अरब लीग के आर्थिक प्रतिबंधों को “सीरिया के लोगों के ख़िलाफ़ एक अप्रत्याशित कदम“ बताया है.

बेरूत में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर के अनुसार सीरिया में इसे देश के खिलाफ़ पश्चिमी देशों की साजिश के तौर पर प्रदर्शित किया जा रहा है, क्योंकि सीरिया इसराइल की खिलाफ़त करता आया है.

माना जा रहा है कि देश में आंतरिक हिंसा से जूझ रहा सीरिया आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद और भी अकेला हो जाएगा.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी सीरियाई सरकार के रूख में जल्दी कोई परिवर्तन आने की संभावना नही है.

सीरिया के पड़ोसी देश इराक और लेबनान पहले ही कह चुके है कि वो सीरिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के खिलाफ़ है.

माना जा रहा है कि ये दोनों देश अरब लीग की बैठक में सीरिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में मत डालेंगे.

सीरिया में बीते आठ महीनों में हो रही हिंसा में साढ़े तीन हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके है.

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