इतिहास के पन्नों में दो दिसंबर

अगर इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो दो दिसंबर को दक्षिण अफ़्रीका में काले अफ़्रीकियों के नेता स्टीव बिको के मामले में अदालत ने पुलिस को आरोपमुक्त कर दिया था और दूसरी ओर अमरीका और नेशनलिस्ट चीन ने एक सुरक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए थे.

1977: पुलिस बिको की मौत के आरोप से बरी

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Image caption नेलसन मंडेला को भी काफ़ी साल जेल में बिताने पड़े थे.

दो दिसंबर को दक्षिण अफ़्रीका में काले अफ़्रीकियों के नेता स्टीव बिको के मामले में प्रिटोरिया के चीफ़ मजिस्ट्रेट मार्टिनस प्रिंस ने माना कि 30 साल के नेता स्टीव बिको की मौत दिमाग़ी चोटों की वजह से हुई थी.

उन्होंने ये भी माना कि ये चोटें पुलिस से हाथापाई के दौरान हुई थीं और उनकी मौत पुलिस हिरासत में हुई.

लेकिन उनका कहना था कि बिको से पूछताछ कर रही पांच सदस्यों की सुरक्षा टीम का कहना था कि इस दौरान वो 'उत्तेजित' हो गए थे.

लेकिन अदालत का कहना था कि मौजूद तथ्यों से ये साबित नहीं होता कि इस मामले में किसी व्यक्ति से किसी का कोई हाथ था.

दक्षिण अफ़्रीका के काले लोगों के नेता स्टीव बिको की मौत पुलिस हिरासत में हो गई थी.

उनकी मौत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भर्त्सना हुई थी जिसके बाद इस मामले की जांच करवाई गई थी.

अदालत के फ़ैसले के बाद क़रबी 200 लोगों ने इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए.

वो नारे लगा रहे थे: "उन्होंने स्टीव बिको की हत्या कर दी. हमने क्या किया है? क्या हमारा दोष ये है कि हम काले हैं?"

सुनवाई के दौरान बिको के परिवार के वकील ने आरोप लगाया था कि उनकी मौत पुलिस के हमले की वजह से हुई थी. पुलिस ने इससे इनकार किया था.

हालांकि उन्होंने ये माना कि उन्हें हथकड़ी लगाई गई थी और हिरासत में उन्हें नंगा रखा गया था. उन्होंने ये भी माना कि अस्पताल ले जाते वक़्त उन्हें कार के फ़र्श पर रखा गया था.

1954: अमरीका और नेशनलिस्ट चीन के बीच संधि

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Image caption अमरीकी राष्ट्रपति ने अमरीकियों के क़ैद किए जाने की निंदा की थी

अमरीका के राष्ट्रपति आइज़ेनहावर ने दो दिसंबर के दिन ही चैंग-काई-शेक के नेशनलिस्ट चीन के साथ परस्पर सुरक्षा संधि की घोषणा की थी.

ये संधि ताईवान स्थित फ़रमोसा और पेस्काडोरेस के लिए थी. चीनी कम्युनिस्टों के 1949 में चीन में सत्ता में आने के बाद चैंक-काई-शेक के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी चीन से फ़ॉरमोसा भाग गए थे.

दोनों देशों के बीच इस संधि को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही थी लेकिन ऐसी उम्मीद नहीं की गई थी कि समझौता इतनी जल्दी हो जाएगा.

इस मामले में जारी एक बयान में कहा गया कि संधि से सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था स्थापित हुई है और इससे पश्चिमी प्रशांत महासागर में कम्युनिस्ट हमले को रोका जा सकेगा.

ये संधि एक ऐसे समय में हुई जबकि 11 अमरीकी सैनिक और दो आम नागरिक चीन में क़ैद थे.

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