अमरीकी सिनेट ने ईरानी केंद्रीय बैंक को निशाना बनाया

अमरीकी सिनेट
Image caption अमरीकी सिनेट के इस क़दम को लेकर राष्ट्रपति बराक ओबामा बहुत उत्साहित नहीं हैं

अमरीकी सीनेट ने ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रस्तावित आर्थिक प्रतिबंधों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है.

इनके तहत ईरान के केंद्रीय बैंक के साथ व्यापार करनेवाले विदेशी कंपनियों और बैंको के विरुद्ध कारवाई किए जाने का प्रावधान है.

लेकिन अभी इस विधेयक को अमरीकी प्रतिनिधित सभा में पेश किया जाएगा और फिर ये अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के समक्ष जाएगा, जो इसके बारे में पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं.

सीनेट ने ये क़दम राष्ट्रपति कार्यालय की इस चेतावनी के बाद भी उठाया गया है कि इससे अमरीका और उसके मित्र देशों के बीच मतभेद पैदा हो सकते हैं.

अधिकतर विदेशी कंपनियाँ ईरान से कच्चे तेल के संबंध में लेन-देन करती हैं. अमरीकी अधिकारियों ने कहा है कि इन आर्थिक प्रतिबंधों से कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी होगी जिसका फ़ायदा ईरान को ही होगा.

यूरोपीय संघ

इससे पहले यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने भी ईरान के विरूद्ध आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करने पर सहमति जताई है.

यूरोपीय संघ ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए

विदेश मंत्रियों के इस प्रस्ताव में ईरान की 180 कंपनियों और व्यक्तियों को पहले से तैयार प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है.

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Image caption ईरान लगातार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मक़सदों के लिए है

यूरोपीय संघ के मंत्रियों के बीच इस बात को लेकर भी सहमति थी कि वो उस तरह के फ़ैसले लेते रहेंगे जिसका असर ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर पडे़गा.

अमरीकी सीनेट के द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों में ईरान को तेल से होने वाली आमदनी को निशाना बनाया गया है.

तेल से संबंधित लेन-देन के सभी काम-काज लगभग ईरान के केंद्रीय बैंक के माध्यम से होता है.

सीनेट के सदस्यों का कहना था कि ये क़दम ईरान की परमाणु आकांक्षाओं पर लगाम लगाने के लिए एक "शांतिपूर्ण राजनयिक साधन" है.

राष्ट्रपति कार्यालय

सीनेट में पास किए गए नए विधेयक को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टी के सदस्यों का सर्मथन प्राप्त था.

लेकिन बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता स्टीव किंगस्टन का कहना है कि नए प्रतिबंधों को लागू होने के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा की मंज़ूरी हासिल होनी होगी जो इस पूरे मामले को कुछ और ही नज़रिया रखते हैं.

हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय ने अब तक लिए गए क़दमों में ईरान की वित्तीय व्यवस्थाओं को निशाना बनाया था उसने ईरान के केंद्रीय बैंक को सीधे-सीधे निशाना बनाने से परहेज़ किया था.

बराक ओबामा का सोचना है कि इस क़दम का असर वित्तीय संकट की इस घड़ी में तेल बाज़ार पर असर डालेगा और इस कारण वो वाशिंगटन के इस क़दम का समर्थन नहीं करेंगे.

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