मिस्र के चुनावी नतीजों में इस्लामी दल मज़बूत

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Image caption मिस्र के चुनाव आयोग के प्रमुख अब्देल इब्राहिम शुक्रवार को चुनाव के नतीजों की घोषणा करते हुए.

मिस्र में हुए संसदीय चुनावों के अब तक आए नतीजों से संकेत मिल रहे हैं इस्लामी दलों को नई संसद में मज़बूत बहुमत मिलने वाला है.

मुस्लिम ब्रदरहुड और सालाफ़ी इस्लामी पार्टी अब तक आए नतीजों में धर्मनिरपेक्ष दलों से कहीं आगे हैं.

हांलाकि ये नतीजे अंतिम नहीं हैं क्योंकि अधिकतर प्रत्याशियों को आने वाले छह हफ़्तों में एक और दौर के चुनाव का सामना करना पड़ेगा.

इसबीच मुस्लिम ब्रदरहुड ने लोगों की इच्छा का सम्मान करने का आहवान किया है.

सालाफ़ी दूसरे नंबर पर

काहिरा स्थित बीबीसी संवाददाता जोन लेएन ने कहा है कि ये मिस्र के इतिहास में शायद पहला पूरी तरह से स्वतंत्र चुनाव है.

फ़रबरी में होस्नी मुबारक के सत्ता छोड़ने के बाद हुए इन चुनावों में 62 फ़ीसदी लोगों ने हिस्सा लिया था.

Image caption 28 और 29 नवंबर को हुए चुनावों में मतदान के लिए कतार में खड़े लोग.

आरंभिक नतीजों मुस्लिम ब्रदरहुड के राजनीतिक अंग फ़्रीडम ऐंड जस्टिस पार्टी सबसे आगे चल रही है.

ब्रदरहुड ने तीस साल तक होस्नी मुबारक के राज का विरोध किया है और ये संस्था पिछले वर्ष तक मिस्र में प्रतिबंधित थी. लेकिन सिंद्धात रूप इसे सहन किया जाता रहा था.

ब्रदरहुड के प्रतिद्वंद्वी इसपर लोगों में खाना और दवाईंया बांटकर उनके वोट पाने का आरोप लगाते रहे हैं.

'लोगों की पसंद का सम्मान करें'

मुस्लिम ब्रदरहुड ने एक बयान ने कहा, “हम सभी और उनसे भी तो ख़ुद को लोकतंत्र से जोड़ते हैं, गुज़ारिश करते हैं कि वो लोगों की पसंद का सम्मान करें. ”

आरंभिक परिणामों में कट्टरपंथी सलाफ़ अल-नूर पार्टी दूसरे स्थान पर है. इसके बाद है धर्मनिरपेक्ष दलों का गठबंधन.

सलाफ़ी सातवीं सदी में हज़रत मोहम्मद और उनके सहयोगियों के समय मे प्रचलित इस्लाम की तर्ज पर मिस्र को चलाना चाहते हैं.

29 और 29 नवंबर को मिस्र के 27 में से नौ प्रांतों में मत डाले गए थे. इनमें 498 सदस्यों वाले निचले सदन के 30 फ़ीसदी सदस्य चुने जाएंगे.

इसके बाद मतदान के दो और दौर अगले छह हफ़्तों में होंगे.

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