'अमीरों-ग़रीबों के बीच अभूतपूर्व फ़ासला'

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Image caption आमतौर पर समानतावादी कहलाए जाने वाले देशों में ग़रीबों और अमीरों के बीच का फ़ासला ज़्यादा बढ़ा है.

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानि ओईसीडी की रिपोर्ट में सामने आया है कि उसके सदस्य देशों में अमीरों और ग़रीबों के बीच का फ़ासला पिछले तीस सालों में सबसे ज़्यादा हो गया है.

ओईसीडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकारों को जल्द ही इस समस्या से निपटने के लिए क़दम उठाने होंगें.

रिपोर्ट में सामने आया है कि 10 प्रतिशत अमीरों की औसत आमदनी 10 प्रतिशत ग़रीबों की आमदनी से नौ गुना ज़्यादा है.

आमतौर पर समानतावादी कहलाए जाने वाले देशों में ग़रीबों और अमीरों के बीच का फ़ासला ज़्यादा बढ़ा है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन और मेक्सिको में अमीरों की आमदनी आज भी ग़रीबों की आमदनी से 25 प्रतिशत ज़्यादा है.

विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में ये फ़ासला और भी ज़्यादा पाया गया है. ब्राज़ील में लोगों की आमदनी के बीच का फ़ासला बहुत ज़्यादा है. हालांकि पिछले एक दशक में ये फ़ासला ब्राज़ील में कम हुआ है.

पेरिस में अपनी रिपोर्ट लॉन्च करते हुए ओईसीडी के महासचिव एन्जल गुरिया ने कहा, “ये शोध उस धारणा को दूर करता है जिसके मुताबिक आर्थिक बढ़ोतरी का फ़ायदा वंचित तबकों तक भी पहुंचता है. जब तक समग्र बढ़ोतरी नहीं होती, तब तक अमीरों और ग़रीबों के बीच का फ़ासला बढ़ता रहेगा.”

ओईसीडी के मुताबिक़ लोगों की आमदनियों में बढ़ते फ़ासले की वजह से उनके बीच का फ़ासला बढ़ रहा है.

इसके अलावा तकनीकी विकास का फ़ायदा केवल ज़्यादा प्रशिक्षित कामगारों को ही मिल पाया है.

टैक्स और सामाजिक असमानता

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए और ज़्यादा मज़दूरों को काम में लगाने की कोशिश की जानी चाहिए.

ओईसीडी का कहना है कि हालांकि बाज़ार की दृष्टि से देखा जाए, तो टैक्स और दूसरी कल्याणकारी योजनाओं से सभी तबकों के बीच की असमानता दूर होती है, लेकिन 1990 के दशक से ये योजनाएं ज़्यादा कारगर साबित नहीं हुई हैं.

यही कारण है कि ज़्यादातर देशों में कल्याणकारी योजनाएं पिछले 15 सालों में फलदायी साबित नहीं हो पाई.

अमीरों पर कम टैक्स लगाए जाने को, इस रिपोर्ट में अमीरों और ग़रीबों के बीच बढ़ते फ़ासले का दूसरा कारण बताया गया है.

ओईसीडी के महासचिव एन्जल गुरिया ने कहा, “हमारी रिपोर्ट साफ़-साफ़ कहती है कि कामगार लोगों को ज़्यादा प्रशिक्षित करने से ही अमीरों और ग़रीबों के बीच के बढ़ते फ़ासले को कम किया जा सकता है. बचपन से ही लोगों में शिक्षा और पेशे से जुड़े प्रशिक्षण के रूप में निवेश करना शुरू कर देना चाहिए.”

ओईसीडी ने अपनी रिपोर्ट में रेखांकित किया है कि सरकारों को अपनी टैक्स प्रणाली में बदलाव लाना होगा और अमीरों पर टैक्स का ज़्यादा भार डालना होगा.

भारत की तस्वीर भी ख़राब

Image caption रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में अमीरों की आमदनी ग़रीबों की आमदनी से 12 प्रतिशत ज़्यादा है.

जहां तक भारत की बात है, तो रिपोर्ट कहती है कि भारत में वक्त के साथ लोगों के बीच आर्थिक असमानताएं बढ़ीं हैं औऱ विभिन्न तबकों की आमदनी के बीच फ़ासला बहुत ज़्यादा बढ़ गया है.

उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर अपनी रिपोर्ट में ओईसीडी ने भारत, चीन, अर्जेन्टीना, ब्राज़ील, इंडोनेशिया, रूस और दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों का आकलन किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ इन सात देशों में से भारत में ग़रीबी दर सबसे ज़्यादा है, जहां 42 प्रतिशत आबादी की रोज़ाना आमदनी केवल 1.25 डॉलर है.

रिपोर्ट के मुताबिक जहां ब्राज़ील, इंडोनेशिया और अर्जेन्टीना ने पिछले कुछ सालों में अमीरों और ग़रीबों के बीच का फ़ासला घटा है, लेकिन चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका और रूस में समय से साथ ये फ़ासला बढ़ा है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में अमीरों की आमदनी ग़रीबों की आमदनी से 12 प्रतिशत ज़्यादा है.

ओबामा का 'असाधारण' बयान

अमीरों और ग़रीबों के बीच बढ़ते फ़ासले को ही अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक नई चुनौती बताया है.

एक असाधारण बयान में ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी की आर्थिक नीतियों की कड़ी ओलोचना की है और अमरीकी अर्थव्यवस्था कि 'ट्रिकल डाउन थ्योरी' पर सवालिया निशान लगाया है.

Image caption बराक ओबामा ने अमरीकी अर्थव्यवस्था की 'ट्रिकल डाउन थ्योरी' पर सविलिया निशान लगाए हैं.

इस थ्योरी के मुताबिक़ अमीर लोगों और उद्योगपतियों को टैक्स में रियायत देने से ग़रीबों को फ़ायदा मिलेगा.

ओबामा ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की वो नीति हमेशा असफल रही है, जिसके तहत अमीरों से कम टैक्स लिया जाता है.

केनसास में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति थियोडॉर रूज़वेल्ट के 1910 के बयान को दोहराते हुए कहा कि अमरीका की ‘मध्यम-वर्गीय जनता के लिए ये कठिन चुनौती की घड़ी है.’

रिपब्लिकन पार्टी पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, “उनके विचार सिर्फ़ इतने ही हैं कि हम ठीक रहें, चाहे बाकी लोग अपनी लड़ाई अकेले ही लड़ते रहें. मैं यहां ये कहने आया हूं कि वे ग़लत हैं.”

अमरीका में अमीरों और ग़रीबों के बीच बढ़ते फ़ासले के बारे में उन्होंने कहा, “इस तरह का फ़ासला हर अमरीकी नागरिक के ख़ुद से किए गए वायदे के ख़िलाफ़ है. इस असमानता से हमारे लोकतंत्र को नुक़सान पहुंचता है.”

महत्तवपूर्ण है कि ओबामा का ये बयान ऐसे समय में आया है जब रिपब्लिकन पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार चुनने के लिए मतदान करने वाली है.

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