'अमरीका में लॉबिंग एक व्यवसाय'

ग़ुलाम नबी फ़ाई इमेज कॉपीरइट AP
Image caption फ़ाई ने माना कि उन्हें गुपचुप तरीक़े से पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से धन मिला था

ग़ुलाम नबी फ़ाई ने मान लिया है कि कश्मीर पर अमरीकी नीति को प्रभावित करने के लिए उन्होंने पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई से धन लिया. लेकिन अमरीका में लॉबिंग कोई ढँकी-छिपी बात नहीं है. अमरीका में बाक़ायदा लॉबिंग के लिए नियम हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि इन नियमों का उल्लंघन नहीं होता. बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने इसी विषय में टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार के विदेशी मामलों के संपादक चिदानंद राजघट्टा से बात की.

अमरीका में लॉबिंग कितने ब़ड़े स्तर पर होती है.

अमरीका में राजनीतिक लॉबिंग एक व्यवसाय है जो कई लोगों को नौकरियाँ देता है. वॉशिंगटन में करीब 20,000 से 40,000 लॉबिस्ट हैं. कई बार राजनेता चुनाव हारने या रिटायर होने के बाद लॉबिस्ट बन जाते है. फ़ाई के मामले में धन बाहर की एक खुफ़िया एजेंसी से आता था और उन्होंने ये स्वीकार किया है. पहले उन्होंने इस बात को छिपाने की कोशिश की.

आपने गुलाम अहमद फ़ाई से मुलाकात भी की है. उन्होंने खुद को कैसे स्थापित किया और उनके सम्मेलनों का राजनीतिज्ञों और कूटनीतिज्ञों पर कितना प्रभाव पड़ता था.

वॉशिंगटन अजीब सा शहर है. यहाँ दुनिया के कई कोनों से लोग आते हैं. उनकी अपनी अलगाववादी सोच होती है. वहाँ इतने लॉबिस्ट हैं कि किसी को आश्चर्य नहीं होता. ऐसे माहौल में कश्मीर का विषय बहुत छोटा था.

सैन्य, औषधि कंपनियों के लॉबिस्ट करोड़ों ख़र्च करते हैं. उनके ख़र्च के मुकाबले में ये ख़र्च कुछ भी नहीं है. लेकिन फिर भी फ़ाई को इतना धन मिलना महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें आईएसआई की ओर से काफ़ी धन मिला. इसका मुकाबला अगर आप तिब्बत से करें तो तिब्बत की अमरीका में कोई लॉबिंग नहीं है.

अमरीका में पाकिस्तान और भारत एक दूसरे के ख़िलाफ़ कैसे लॉबिंग करते हैं?

भारत की ओर से लॉबिंग का मुख्य विषय व्यापार है. उसकी राजनीतिक लॉबिंग बहुत कम है, ख़ासकर कश्मीर के बारे में. वॉशिंगटन में भारत की काफ़ी साख है, लेकिन पाकिस्तान की छवि काफ़ी ख़राब है.

लॉबिंग कैसे होती है?

लोग नेताओं के राजनीतिक मुहिमों में धन देते हैं. उस पर निगाह रखी जाती है लेकिन लोग नियम तो़ड़ने के तरीके ढूँढ ही लेते हैं. जब वो सेनेटर कांग्रेस के लिए चुन लिया जाता है तो लोग उसके पास बिल पास करवाने जाते हैं.

आप किसी थिंकटैंक वाले से लेख लिखवा सकते हैं. आप संपादकों के नाम नकली चिट्ठियाँ लिखवा सकते हैं. जैसे पाकिस्तान में टेक्सस की एक कंपनी को लॉबिंग के लिए रखा था. उनका काम था अख़बारों पर निगाह रखना या पाकिस्तान पर लग रहे आरोपों का जवाब देने के लिए लोगों से चिट्ठी लिखवाना.

पिछले 15-16 साल से जब से मैं अमरीका में हूँ, तबसे पाकिस्तान ने बहुत धन ख़र्च किया है. एक वक्त था जब पाकिस्तान के लिए सात लॉबिस्ट कंपनियाँ काम करती थीं, जबकि भारत के लिए एक या दो.

जब मैं एक लॉबिस्ट के पास गया तो भारत के लिए उनकी क़ीमत 50,000 डॉलर प्रति महीना थी. ये कुछ भी नहीं है. इथियोपिया जैसा देश भी एक-दो मिलियन ख़र्च कर देता होगा.

संबंधित समाचार