इतिहास के पन्नों में दस दिसंबर

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Image caption इराक मे साढ़े चार महीने पहले बंधक बनाए गए ब्रिटेन के लोगों को सद्दाम हुसैन सरकार ने रिहा कर दिया

इतिहास में दस दिसंबर की तारीख़ के नाम कई महत्वपूर्ण घटनाएं दर्ज हैं.

1990 सद्दाम हुसैन ने ब्रितानी बंधकों को छोड़ा

आज ही के दिन इराक़ मे साढ़े चार महीने पहले बंधक बनाए गए ब्रिटेन के लोगों को तत्कालीन सद्दाम हुसैन सरकार ने रिहा कर दिया.

मुक्त हुए सौ बंधकों को हवाई जहाज़ से लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतारा गया. साथ ही ये वादा भी किया गया कि बचे हुए 400 बंधकों को जल्द रिहा कर दिया जाएगा.

2 अगस्त 1990 को इराक़ ने कुवैत पर आक्रमण कर दिया था और इसके बाद वहाँ रह रहे तमाम विदेशी लोगों को बंधक बना लिया था. ये इस आक्रमण के बाद छिपने को मजबूर हो गए थे.

पूर्व प्रधानमंत्री एडवर्ड हीथ ने ब्रितानी बंधकों की रिहाई के लिए काफ़ी प्रयास किए और इराक़ी नेताओं से वार्ता करने के लिए बग़दाद पहुँचे थे.

एडवर्ड हीथ के प्रयासों से ही इन बंधकों की रिहाई सुनिश्चित हुई.

1961 नोबेल समारोह में रंगभेद के ख़िलाफ़ आवाज़

नार्वे के ओस्लो शहर में 1960 के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रतिबंधित अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के नेता अल्बर्ट लूथली ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद समाप्त करने की अपील की थी.

अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा था कि वो ये पुरस्कार उन लोगों के लिए स्वीकार कर रहे हैं जिन्होंने रंगभेद को आजीवन सहा और कुर्बानी दी. इस पुरस्कार से उनके बलिदान को एक पहचान मिली है.

समारोह में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव डैग हमार्सज़ोल्ड को 1961 के लिए मरणोपरांत शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया.

उन्हें ये पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के ख़िलाफ़ लड़ने और शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए दिया गया.

सितम्बर महीने में एक हवाई दुर्घटना में उनका निधन हो गया था. उनकी ओर से ये पुरस्कार नार्वे में स्वीडन के राजदूत ने स्वीकार किया.

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