'इंटरनेट को सीमाओं में बांधना घातक होगा'

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Image caption क्लिंटन ने कहा कि इंटरनेट अगर कमज़ोर होगा तो सबके लिए होगा

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने दुनिया भर में सरकारों की ओर से इंटरनेट को नियंत्रित करने के प्रयासों को ख़तरनाक बताया है. क्लिंटन ने कहा है कि अमरीका इंटरनेट की स्वतंत्रता को दुनियाभर में अपने द्वारा किए जा रहे काम में शामिल करेगा.

क्लिंटन नीदरलैंड की सरकार और गूगल द्वारा 'डिजिटल स्वतंत्रता' पर आयोजित किए गए एक सम्मलेन में बोल रहीं थीं.

इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने देशों और निजी उद्योग धंधों से आग्रह किया कि वो इंटरनेट की स्वतंत्रता को बाधित करने के बढ़ते प्रयासों से लड़ें.

हर कोई प्रभावित

क्लिंटन ने कहा कि इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाना केवल लोगों की मूलभूत स्वतंत्रता और मानवाधिकार को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित होता है.

क्लिंटन ने कहा,"जब विचार बाधित होते हैं, सूचनाएं मिटा दी जाती हैं, बातचीत को रोका जाता है और लोगों को चुनने को देने के अवसर कम किए जाते हैं तो इंटरनेट हम सबके लिए कमज़ोर हो जाता है."

क्लिंटन ने कहा, "कोई आर्थिक इंटरनेट, सामाजिक या राजनितिक इंटरनेट अलग से नहीं है. हम सभी के लिए केवल एक इंटरनेट है."

अमरीकी विदेश मंत्री ने चीन, सीरिया, ईरान और रूस जैसी तथाकथित दमनकारी सरकारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन सरकारों ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों की मदद से इंटरनेट और उसके इस्तेमाल को बाधित किया है.

क्लिंटन ने इस बात पर भी चिंता जताई कि धीरे-धीरे प्रजातांत्रिक देशों की सरकारें भी सूचना और इंटरनेट को नियंत्रित करने की कोशिशें कर रहीं हैं.

प्रजातांत्रिक सरकारें भी दोषी

हाल ही में भारत के केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने याहू, फेसबुक और गूगल को आदेश दिया था कि यह कम्पनियां अपनी वेबसाइटों पर आने वाली उन चीज़ों को काबू में लाएं जो कि भारत सरकार को "आपत्तिजनक" और भड़काऊ लगतीं हैं.

दिसंबर महीने के आरंभ में दक्षिण कोरिया के संचार आयोग ने कहा था कि वो जल्द ही सोशल नेटवर्किंग साइटों और मोबाइल एप्लीकेशंस की समीक्षा शुरू करेगा ताकि "अनुचित और अनैतिक" चीज़ों को हटाया जा सके. इस काम के लिए सरकार आठ अधिकारियों को नियुक्त करेगी जो सोशल नेटवर्किंग साइटों पर आने वाली चीज़ों पर नज़र रखेगें. दक्षिण कोरिया के अनुसार ऐसा करना उत्तर कोरिया के दुष्प्रचार के खिलाफ़ कदम उठाने के लिए भी ज़रूरी है.

एक अमरीकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल के अनुसार गुरुवार को रूस की सरकार ने देश की सबसे ज़्यादा प्रचलित सोशल नेटवर्किंग साइट को आदेश दिया कि वो चुनाव में की गई धांधलियों को लेकर विपक्षी गुटों की शिकायतों को वेबसाइट से हटा दें.

इंटरनेट पर कब्ज़े की जंग

हाल ही में रूस, चीन, उज़्बेकिस्तान और तज़ाकिस्तान की सरकारों ने संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पेश किया है जिसमें दुनिया में इंटरनेट की प्रबंधन व्यवस्था में बदलाव लाने की बात कही गई है. अमरीका ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है.

क्लिंटन ने दावा किया कि इस तरह का प्रस्ताव इंटरनेट के चरित्र को बदल देगा. उन्होंने कहा, "वो एक ऐसी व्यवस्था लाना चाहते हैं जो इंटरनेट पर संसाधनों, संस्थानों और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के ऊपर अधिक काबिज़ हो और जिस पर सरकारों का अधिक नियंत्रण हो. राष्ट्रीय सीमाओं में इंटरनेट को बांधना घातक होगा.''

वर्तमान में दुनिया कs ज़्यादातर बड़े सर्च इंजन और सोशल नेटवर्किंग वेब साइट चलाने वाली कंपनियों के सर्वर अमरीका में स्थित हैं. आम तौर पर कभी भी कहीं से भी दबाव पड़ने की हालत में यह कम्पनियां कहती हैं कि उन पर अमरीका के कानून लागू होते हैं जहाँ बोलने की आज़ादी है.

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