इतिहास के पन्नों में - 11 दिसंबर

11 दिसंबर का दिन इतिहास के पन्नों में कई वजहों से दर्ज़ है.

1941: जर्मनी और इटली ने अमरीका पर युद्ध का ऐलान किया

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Image caption हिटलर 1930 के दशक से ही अमरीका के नस्लभेदी ना होने की वजह से उस देश के ख़िलाफ़ थे.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 11 दिसंबर 1941 को जर्मनी और इटली ने अमरीका पर युद्ध का ऐलान कर दिया था.

पहले इटली के शासक बेनिटो मुसोलिनी और फिर जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने ये घोषणा की.

हिटलर ने अमरीकी राष्ट्रपति रूज़वेल्ट पर जर्मनी के ख़िलाफ़ अभियान चलाने का आरोप लगाया औऱ 1939 की लड़ाई के लिए ज़िम्मेदार बताया.

इसके जवाब में अमरीका ने भी दोनों ‘एक्सिस’ देशों पर युद्ध की घोषणा कर दी.

इससे दो दिन पहले ही अमरीका ने तीसरे ‘एक्सिस’ देश, जापान पर युद्ध का ऐलान किया था.

राष्ट्रपति रूज़वेल्ट ने अमरीकी कांग्रेस में कहा कि पूरी दुनिया पर कब्ज़ा करने की तमन्ना रखने वाली सेनाएं अब दुनिया के इस हिस्से की ओर बढ़ रही हैं, इसलिए उन्हें रोकना ज़रूरी हो गया है.

कांग्रेस में सभी ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, सिवाय एक महिला सांसद जीनेट रैंकिन के. रैंकिन ने जापान पर युद्ध के ऐलान का समर्थन भी नहीं किया था.

1994: चेचन्या में दाखिल हुई रूसी सेना

11 दिसंबर 1994 के दिन रूस के त्तकालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने चेचेन विद्रोहियों पर हमला बोलते हुए उनके इलाके में सेना भेज दी.

रूस की सेना के मुताबिक उनका मक़सद इलाके में संवैधानिक अनुशासन लौटाना था.

इस मुस्लिम-बहुल इलाके ने तीन वर्ष पहले सोवियत सेना के पूर्व जेनरल ज़ोखर दुदायेव के न्तृत्व में रूस से आज़ादी का ऐलान किया था.

लेकिन अगस्त 1994 में रूस ने दुदायेव को हटाने के लिए एक अस्थायी आयोग बनाने की कोशिश की.

दो हफ़्तों तक हवाई बमबारी के बावजूद जब चेचेन विद्रोहियों को नहीं रोका जा सका तो रूस ने सेना भेजी.

चेचेन्या क़रीब दो सदियों से रूसी शासन के ख़िलाफ़ लड़ता रहा था और 1994 में सेना भेजे जाने के बाद क़रीब दो वर्ष लंबा युद्ध चला जिसमें क़रकीब एक लाख लोगों की जान गई.

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