सेलिया सांचेस, कास्त्रो की प्रेमिका?

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Image caption सेलिया सांचेस और फ़िडेल कास्रो की ये तस्वीर फरवरी 1957 में ली गई थी.

इस बात पर किसी को शक नहीं कि महिला क्रांतिकारी सेलिया सांचेस ने क्यूबा के नेता फ़िदेल कास्त्रो के जीवन में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन सांचेस की मौत के 30 साल बाद भी इस बात पर बहस जारी है कि दोनों के संबंध कितने अंतरंग थे.

क्यूबा की क्रांति में दो दशकों तक सक्रिय रहनेवाली सांचेस की मुलाक़ात कास्त्रो से साल 1957 में हुई थी जिसके बाद वो क्यूबा के नेता की सबसे अहम सहायक बन गईं.

ऐसे क़्यास लगाए जाते रहे हैं कि दोनों प्रेमी थे. लेकिन न तो सांचेस और न ही कास्त्रो ने इन अफवाहों पर कभी कुछ कहा.

क्यूबा के बाहर तो सांचेस के अहम योगदान के बारे में कुछ लिखा ही नहीं गया जो उन्होंने साल 1980 तक जीवित रहते हुए देश के लिए की थी.

पहली मुलाकात

दोनों की पहली तस्वीर एक साथ साल 1957 में ली गई थी. लेकिन तब तक वो कास्त्रो के जीवन में बहुत अहम बन चुकी थी और उनकी भूमिका बहुत बड़ी थी.

जब दिसंबर 1956 में कास्त्रो मेक्सिको से क्यूबा पहुंचे, जिस दौरान उनके अधिकांशतर साथी मारे गए थे, तब सांचेस के जुटाए हूए किसानों ने ही बाग़ियों को मदद मुहैया कराने का काम किया था.

सेलिया सांचेस का जन्म साल 1920 के मीदिया लूना के शहर में हुआ था. उनकी माँ की अपनी जवानी में ही मौत हो गई थी.

वह अपने पिता डाक्टर मेनुअल सांचेस सिलवेरिया के काफ़ी क़रीब थीं. सेलिया ने राजनीति अपने पिता से सीखी थी और उनके सहायक के तौर पर उनके मरीज़ों में ग़रीबी को क़रीब से देखा और महसूस किया था.

उनकी पहचान पूरे इलाक़े में थी. और उनके ये संबंध बाद में उनके बहुत काम आए.

तख़्तापलट

साल 1952 में क्यूबा में तख़्तापलट के बाद जब बतिस्ता ने दोबारा सत्ता संभाली तो लाखों क्यूबा वासियों की तरह सांचेस को भी बेहद क्रोध आया था.

उन्हें विश्वास था कि बतिस्ता को सत्ता से हटाने के लिए हिंसा के अलावा कोई रास्ता नहीं है और उन्होंने इसके लिए समर्थन जुटाना शुरु कर दिया.

अर्जेंटीना के क्रांतिकारी चे गुऐरा और सांचेस अच्छे मित्र बन गए. एक अभियान पर जाते से पहले गुऐरा ने सांचेस को निशानी के तौर पर अपनी टोपी भेंट की थी.

ये गुऐरा का अंतिम अभियान साबित हुआ.

साल 1953 के जुलाई माह में कास्त्रो ने बतिस्ता का तख़्तापलट करने के इरादे से संतिआगो के मोनकाडा छावनी पर हमला बोला. सांचेस भी 26 जुलाई के आंदोलन का हिस्सा थीं.

खास सहायक

जब कास्त्रो साल 1959 में सत्ता में आए तो सांचेस उनकी सबसे खास सहायक थीं और अपनी मृत्यू तक उनके साथ काम करती रहीं.

कई क्रांतिकारी अभियानों की ज़िम्मेदारी उनपर थी.

कास्त्रो की गुरिल्ला मुहिम में भाग लेने वाले मियामी के 92 वर्षीय हुबेर मातोस का कहना है, ''मैं कोस्टारिका में हथियार लेने गया था. जब मैं साल 1958 में वापिस आया तो मैंने देखा कि सेलिया सांचेस और कास्त्रो साथ साथ थे. तब मैंने जाना कि उनके संबंध केवल राजनीतिक नहीं थे बल्कि वो बहुत क़रीब थे.''

उन्होंने कहा, ''उन्होंने जताना चाहा कि ऐसा कुछ नहीं है लेकिन मुझे यह समझने के लिए कि उनके रिश्ते राजनीति से परे भी हैं, उन्हें साथ बिस्तर में देखने की ज़रूरत नहीं थी.''

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