इतिहास के पन्नों में 14 दिसंबर

इतिहास में 14 दिसंबर की तारीख़ कई महत्त्वपूर्ण घटनाओं के लिए प्रसिद्ध है. इसी दिन बोस्निया शांति समझौते पर दस्तख़त हुआ था और इराक़ के पूर्व शासक सद्दाम हुसैन पकड़े गए थे.

1995: बोस्निया शांति समझौते से तीन साल से जारी युद्ध समाप्त हुआ

Image caption समझौता होने से पहले गृह युद्ध में दो लाख से ज़्यादा लोग मारे गए

14 दिसंबर 1995 को बोस्निया, सर्बिया और क्रोएशिया के नेताओं ने पेरिस में डेटन संधि पर दस्तखत कर साढ़े तीन साल से जारी बाल्कन युद्ध को समाप्त किया था.

समझौते के तहत बोस्निया को एक राज्य बनाए रखा गया था लेकिन इसे दो हिस्से में बाँट दिया गया था.

मुस्लिम और क्रोएशियाई आबादी वाला पहला हिस्सा देश के 51 फ़ीसदी भूभाग का प्रतिनिधित्व करता था जबकि सर्ब गणराज्य के पास बाक़ी का 49 फ़ीसदी भूभाग था.

सर्बिया के नेता स्लोबोदोन मिलोसेविच, क्रोएशिया के फ़्रांजो तुजमैन और बोस्निया के इलिजा इजेत्बिगोविक ने यूरोपीय राज्याध्यक्षों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों की मौजूदगी में इस समझौते पर दस्तख़त किया था.

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बोस्निया यूरोप का एकमात्र ऐसा देश था जहां हुए गृहयुद्ध में दो लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे और कई लाख लोग बेघर हो गए थे.

समझौते की अगुवाई कर रहे अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कहा था कि अब ये तीनों नेताओं और वहां के निवासियों पर निर्भर है कि वो शांति कैसे सुनिश्चित करते हैं.

2003: सद्दाम हुसैन को पकड़ा गया

Image caption सद्दाम हुसैन की ये अस्तव्यस्त तस्वीर अमरीकी सेना ने जारी की थी.

इसी दिन 2003 में इराक के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को अमरीकी सेना ने अपने कब्ज़े में ले लिया था.

सद्दाम हुसैन अपने गृह नगर तिकरित से 10 किलोमीटर दक्षिण में एक फ़ार्महाउस के बंकर में छिपे हुए थे जब उन्हें ढूंढ निकाला गया.

अमरीकी सेना के एक प्रवक्ता मेजर जनरल रेमंड ओडिएर्नो ने कहा था कि सद्दाम हुसैन के ठिकाने का पता उनके ही परिवार के एक सदस्य ने बताया था.

अमरीकी अधिकारियों ने सद्दाम हुसैन का पता बताने वाले को ढाई करोड़ डॉलर का इनाम देने की घोषणा की थी.

सद्दाम हुसैन एक ऐसी जगह में छिपे थे जहां एक व्यक्ति केवल लेट सकता था. बंकर का मुंह बंद कर दिया गया था और वो एक पाइप के ज़रिए सांस ले रहे थे.

उनके पास एक रिवॉल्वर था लेकिन उन्होंने बिना किसी प्रतिरोध के आसानी से आत्मसमर्पण कर दिया था.

सद्दाम हुसैन को पकड़ने के बाद अमरीकी सेना ने उनकी जो तस्वीर जारी की थी उसमें उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी और वो अस्त-व्यस्त नज़र आ रहे थे.

अमरीकी सेना ने अप्रैल महीने में बगदाद में प्रवेश किया था और तभी से इराक के पूर्व राष्ट्रपति को कहीं भी देखा नहीं गया था.

उनकी तलाश के लिए ऐतिहासिक अभियान चलाया गया था लेकिन उसके बावजूद वो आठ महीने तक बचते रहे थे.

जैसे ही उनके पकड़े जाने की ख़बर फैली इराक़ में लोग जश्न मनाने लगे.

हालांकि सद्दाम के गढ़ माने जाने वाले तिकरित और फलूजा शहर में ख़ामोशी पसरी थी.

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