सीरिया में पाँच हज़ार से ज़्यादा की मौत: संयुक्त राष्ट्र

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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीरिया में अब तक प्रदर्शनों में पाँच हज़ार से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था की प्रमुख नवी पिल्लई ने सुरक्षा परिषद को सिफ़ारिश की है कि सीरिया का मामला अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कोर्ट के पास भेज देना चाहिए.

नवी पिल्लई ने आगाह किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता सीरियाई प्रशासन के हौसले को और बल देगी.

यूरोपीय संघ 10 बार सीरिया पर प्रतिबंध लगा चुका है, अरब लीग ने उसे निलंबित कर दिया है लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया पर निंदा प्रस्ताव पारित नहीं किया है.

अक्तूबर में सीरिया पर आए मसौदे पर रूस और चीन ने वीटो कर दिया था. जबकि भारत, दक्षिण अफ़्रीका और ब्राज़ील भी सुरक्षा परिषद में सीरिया के ख़िलाफ़ क़दम उठाए जाने के बहुत इच्छुक नहीं थे.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था की प्रमुख ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि सीरिया में कुल 14 हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की आशंका है जबकि 12,400 लोग दूसरे देशों में भाग गए हैं.

नवी पिल्लई ने स्थिति को असहनीय बताया और कहा है कि संभवतः मानवता के ख़िलाफ़ अपराध हुए हैं.

उन्होंने कहा है कि पाँच हज़ार मृतकों के इस अनुमान में सुरक्षाबल शामिल नहीं है. सीरिया सरकार का कहना है कि एक हज़ार से ज़्यादा पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं.

हिंसा जारी

उधर विपक्षी कार्यकर्ताओं के मुताबिक़ सोमवार को हुई झड़पों में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं.

इसी हिंसा के बीच सीरिया में स्थानीय चुनाव हुए हैं लेकिन काफ़ी कम लोग मत डालने गए. जबकि सीरियाई सरकारी एजेंसी का दावा है कि लोग बड़ी संख्या में मतदान करने पहुँचे.

वहीं तुर्की से बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ विपक्ष के वर्चस्व वाले इलाक़ों में कार्यकर्ताओं ने कहा है कि वहाँ का नज़ारा देखकर तो ये बताना भी मुश्किल है कि वाकई चुनाव हुआ है.

अधिकारियों का दावा है कि पिछले सालों के मुकाबले मतदान निष्पक्ष तरीके से हुआ है लेकिन विपक्ष ने बहिष्कार की माँग की है.

सीरिया में हताहत हुए लोगों की असल संख्या जानना मुश्किल है क्योंकि स्वतंत्र रूप से स्थिति पर नज़र रखने वाली कोई संस्था नहीं है. सीरिया ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को देश में आने की इजाज़त नहीं दी है.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी नवी पिल्लई के मुताबिक मार्च में शुरु हुए प्रदर्शन आम तौर पर शांतिपूर्ण रहे हैं लेकिन सीरियाई सरकार पर हमले बढ़ रहे हैं.

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