अंतिम अमरीकी सैनिक इराक़ से विदा हुए

इमेज कॉपीरइट AP

इराक़ में मौजूद अंतिम अमरीकी सैनिक भी अब इराक़ छोड़कर कुवैत चले गए हैं. इसके साथ ही यहाँ क़रीब नौ साल पुराना अमरीकी सैन्य अभियान ख़त्म हो गया है.रविवार सुबह इन सैनिकों का काफ़िला कुवैत सीमा में प्रवेश कर गया.

इराक़ में अमरीकी सेना का अभियान 2003 में अमरीका के हमले से शुरु हुआ था जिसके बाद सद्दाम हुसैन शासन का अंत हो गया था.

सद्दाम को सत्ता से हटाए जाने के बाद इराक़ में विद्रोहियों के साथ संघर्ष जारी रहा. इस दौरान लगभग 4500 अमरीकी मारे गए, 32000 घायल हुए और सैकड़ों अरब डॉलर सैन्य अभियान पर ख़र्च किए गए.

एक समय इराक़ में एक लाख 70 हज़ार अमरीकी सैनिक मौजूद थे और उसके 500 से ज़्यादा अड्डे थे.

अब इराक़ में केवल 157 अमरीकी सैनिक बचे हैं जो वहाँ के दूतावास में प्रशिक्षण का कामकाज देखेंगे. इसके अलावा कूटनीतिक मिशन की रक्षा में लगे कुछ मरीन हैं.

राष्ट्रपति ओबामा ने अक्तूबर में घोषणा की थी कि सभी अमरीकी सैनिक 2011 के अंत तक इराक़ छोड़ देंगे. ये तारीख़ पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 2008 में तय की थी.

आगे की चुनौतियाँ

इमेज कॉपीरइट na

अमरीका अपने पीछे प्रशिक्षित इराक़ी सुरक्षाबल छोड़कर जा रहा है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ अगर ये इराक़ी सुरक्षाबल एकजुट हो कर काम करें तो आंतरिक सुरक्षा की स्थिति को संभाल सकते हैं.

इराक़ में आज भी हिंसा में हर महीने क़रीब 350 लोग मारे जाते हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये सुरक्षाकर्मी अभी देश की सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं हालांकि अभी विदेशी हमले की सूरत नज़र नहीं आती.

इराक़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थायित्व है. एक ओर जहाँ अमरीकी सैनिक इराक़ छोड़ रहें हैं वहीं इराक़ में राजनीतिक संकट चल रहा है. अयाद अलावी का इराक़िया गुट संसद से हट गया है.

कुर्दों की तरह दो सुन्नी प्रांत अपने आप को स्वायत्त घोषित करना चाहते हैं. इसके अलावा ये धारणा भी आम है कि अमरीका के जाने के बाद ईरान का दबदबा बढ़ जाएगा.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि वैसे तो ज़्यादातर इराक़ी मानते हैं कि अमरीकियों के जाने का समय आ चुका है लेकिन आगे आने वाली चुनौतियों को लेकर वे चिंतित भी हैं.

संबंधित समाचार