कृष्णा ने कहा, गीता पर पाबंदी की मांग बेतुकी

रूस में इस्कॉन के अनुयायी इमेज कॉपीरइट AFP

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि उन्होंने रूस में भगवद् गीता पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश का मामला रूस के साथ उठाया है. उन्होंने कहा कि रूस स्थित भारतीय दूतावास ने रूसी अधिकारियों के इस संबंध में बात की है.

संसद में अपने बयान में उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस भगवद् गीता पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा. संसद में सोमवार को भी इस मुद्दे पर काफ़ी शोर-शराबा हुआ था.

एसएम कृष्णा ने कहा, "भगवद गीता पर प्रतिबंध लगाने की मांग बेतुकी है. भारतीय दूतावास के अधिकारी इस्कॉन से भी संपर्क में हैं."

लेकिन भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि विदेश मंत्री को प्रतिबंध हटवाना चाहिए न कि रूस की सरकार से उम्मीद करनी चाहिए. उन्होंने भगवद् गीता को राष्ट्रीय पुस्तक घोषित करने की मांग भी की.

दुख

इस बीच रूस में भगवद् गीता पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशों पर चल रहे हंगामे के बीच भारत में रूस के राजदूत ने इस मामले पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि ये बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि किसी पवित्र ग्रंथ को अदालत में ले जाया गया है.

एक बयान जारी करके रूसी राजदूत एलेक्ज़ेंडर एम कैडाकिन ने कहा, "ये अजीब है कि ऐसी घटनाएँ साइबेरिया के ख़ूबसूरत यूनिवर्सिटी शहर टोम्स्क में हो रही हैं, जो अपनी धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक सहनशीलता के कारण मशहूर है. ये काफ़ी दुखद है."

इस बीच रूस में भागवद् गीता पर पाबंदी को रोकने के लिए वहाँ के हिंदुओं को अदालत ने राहत दी है. अब अदालत ने 28 दिसंबर को फ़ैसले से पहले रूस के मानवाधिकार आयोग को पेश होने के लिए कहा है.

हिंदुओं की ओर से मिखाइल फ़्रोलोव अदालत साइबेरिया की अदालत में पेश हुए. साइबेरिया के टोम्स्क शहर की एक अदालत ने भागवद गीता पर पाबंदी लगाई है.

अपील

फ्रोलोव ने अदालत ने गुहार लगाई कि वे भागवद गीता और धार्मिक रूप से अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर रूसी मानवाधिकार आयोग का पक्ष सुने और फिर जज फ़ैसला सुनाए.

इस अपील के बाद अदालत ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग का पक्ष सुनने के लिए रजामंदी जताई.

ये मामला जून से चल रहा है. अदालत से भागवद् गीता के रूसी अनुवाद पर रोक लगाने की मांग की गई है. इसका अनुवाद इस्कॉन के संस्थापक एसी भक्तिवेदांता स्वामी प्रभुपाद ने किया है.

अदालत से ये भी मांग की गई है कि हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथों पर पाबंदी लगाई जाए और इसे ऐसा साहित्य माना जाए, जो सामाजिक मतभेद को बढावा देते हैं. साथ ही इन ग्रंथों के वितरण को ग़ैर क़ानूनी बनाने की भी मांग है.

दखल

मॉस्को में रहने वाले भारतीयों और इस्कॉन के अनुयायियों ने भारत सरकार से अपील की है कि वो इस मामले के हल के लिए राजनयिक रूप से दखल दे.

सोमवार को भारतीय संसद में भी इस मामले पर हंगामा हुआ और कई सांसदों ने सरकार से इस मामले में दखल की मांग की.

संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा है कि सरकार ने इस मामले पर नज़र रखे हुए है.

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण को अपमानित करने के किसी भी क़दम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कई सांसदों ने भी ऐसी ही राय प्रकट की. लालू प्रसाद यादव ने सरकार से अपील की कि वो इस मामले पर रूस से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराए.

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