बर्ड फ़्लू पर शोध ने उड़ाई अमरीका की नींद

बर्ड फ़्लू इमेज कॉपीरइट AP
Image caption शोधपत्र में बर्ड फ़्लू के एक नए प्रकार पर शोध किया गया है जिसका वायरस जानवरों के बीच पहले के मुकाबले और जल्दी फ़ैलता है.

बर्ड फ़्लू पर विवादास्पद शोधपत्र के सामने आने से अमरीका चिंतित है. अमरीका को डर है कि शोधपत्र की जानकारियों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में किया जा सकता है.

लेकिन अब ख़बरें आ रही हैं कि ये शोधपत्र लिखने वाले दो वैज्ञानिक शोध के कुछ हिस्सो को हटाने पर राज़ी हो गए हैं.

शोधपत्र में बर्ड फ़्लू के एक नए प्रकार पर शोध किया गया है, जिसका वायरस जानवरों के बीच पहले के मुक़ाबले और जल्दी फैलता है.

अमरीका ने वैज्ञानिकों से आग्रह किया था कि वो शोध के कुछ हिस्सों को हटा लें, ताकि संवेदनशील जानकारियों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में न हो पाए.

सरकार को सलाह देने वाले एक पैनल नेशनल साइंस एडवाइजरी बोर्ड फ़ॉर बायोसिक्योरिटी के मुताबिक़ कुछ चरमपंथी गुट इन जानकारियों का उपयोग गलत तरीक़े से कर सकते हैं.

शोध

शोधपत्र में बर्ड फ़्लू के एक प्रकार के बारे में बताया गया है, जिसके वायरस जानवरों में तेज़ी से फैलते है.

ये शोध साइंस और नेचर पत्रिका में छापा जाना है. पत्रिका के संपादकों ने कहा है कि वो विवादास्पद जानकारियों को तब तक नही हटाएंगे, जब तक उन्हें ये भरोसा न दिया जाए कि इन जानकारियों का इस्तेमाल शोधकर्ता कर सकेंगे.

अमरीकी स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वो एक ऐसे ही प्रणाली को बनाने के प्रयास में है.

साइंस पत्रिका के अनुसार कई वैज्ञानिक नए सुझावों के अनुरूप अपना शोधपत्र दोबारा लिख भी चुके हैं.

अल्बर्ट ऑस्टरहॉस ने साइंस पत्रिका को बताया कि उनका दल नेशनल साइंस एडवाइजरी बोर्ड फ़ॉर बायोसिक्योरिटी के सुझावों के ख़िलाफ़ है.

हालांकि ऑस्टरहॉस का मानना है कि ये जानकारियां खुले तौर पर मिलनी चाहिए.

विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने साइंस पत्रिका से कहा है कि उनके शोधकर्ताओं का दल अपने लेख को सुधार कर नेचर पत्रिका को भेजेगा.

तेज़ फ़ैलने वाला वायरस

जानलेवा बीमारी बर्ड फ़्लू का दायरा सीमित रहा है, क्योंकि ये जल्दी लोगों पर असर नही करता है.

हालांकि इस नए शोध के बाद पता चला है कि बर्ड फ़्लू का एक जीवाणु बड़ी आसानी से एक जानवर से दूसरे के शरीर में जा सकता है.

नेशनल साइंस एडवाइजरी बोर्ड फ़ॉर बायोसिक्योरिटी ने एक वक्तव्य में कहा, ''बर्ड फ़्लू के वायरस में बदलाव का मतलब है कि इस बीमारी से इंसानो के लिए ख़तरा बढ़ जाएगा.''

नेचर और साइंस पत्रिका के संपादकों की मांग है कि अमरीकी सरकार इस बारे में अपनी नीति स्पष्ट करे कि हटाई जाने वाली जानकारियों की मांग करने वाले 'ज़िम्मेदार वैज्ञानिकों' को पूरा शोध कैसे उपलब्ध कराया जाएगा.

साइंस पत्रिका के मुख्य संपादक ब्रूस एल्बर्ट्स ने कहा, ''बुखार पर काम करने वाले कई वैज्ञानिकों को ऐसे शोध से मिली जानकारी हासिल करने का अधिकार होता है, ताकि वह आम लोगों को बीमारियों से सुरक्षित रख पाए, ख़ास तौर पर अगर वो इसी वायरस पर काम कर रहे हो.''

सलाह

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption शोध के बाद बुखार का जीवाणु बड़ी आसानी से एक जानवर से दूसरे के शरीर में जा सकता है

माना जा रहा है कि साल 2001 में हुए एंथ्रेक्स हमलों के समय बने इस सरकारी पैनल की ये सलाह अप्रत्याशित है.

अमरीकी नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ हेल्थ के एंथनी फ़ौसी का कहना है कि सही परिचय के लोगों को बर्ड फ़्लू पर पूरा शोध देख पाने के लिए प्रणाली बनाई जा रही है.

उनका कहना था कि ये प्रणाली पत्रिका के जनवरी में छपने के पहले तैयार हो जाएगी, लेकिन कुछ अहम जानकारियों को सिर्फ़ उन लोगों तक ही सीमित करना ज़रूरी है, जो सीधे स्वास्थ कार्यक्रमों से जुड़े है.

फ़ौसी ने कहा, ''सबसे ज़रूरी सवाल है कि बर्ड फ़्लू के नए शोध की पूरी जानकारी का जनता के स्वास्थ्य से क्या संबंध है''.

अमरीका की स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने सुझावों को स्वीकार किया है.

संबंधित समाचार