पश्चिम बंगाल से गए 166 हज यात्री लापता

Image caption हज यात्रा लगभग डेढ़ महीने की होती है.

हज यात्रा पर गए भारत के हाजियों को वापस आए क़रीब एक महीना होने को है, लेकिन पश्चिम बंगाल के 166 हज यात्रियों का अभी तक कुछ पता नहीं चला है.

हैरानी की बात यह है कि ये सभी हज यात्री पश्चिम बंगाल के एक ही ज़िले मुर्शिदाबाद के रहने वाले हैं.

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इन लोगों से वहां भिक्षावृत्ति कराई जा रही है. इन सबके पीछे किसी गिरोह के होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

जेद्दा में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूत फ़ैज़ अहमद क़िदवई ने बीबीसी से बातचीत के दौरान इस ख़बर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध में सारी जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय और पश्चिम बंगाल सरकार को दे दी है.

उनके अनुसार फ़लाइट्स रिकॉर्ड की जांच करने पर उन्हें पता चला कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आने वाले 166 हाजी उन फ़लाइटों से वापस नहीं गए जिनसे उन्हें भारत वापस जाना था.

क़िदवई ने बताया कि सऊदी अरब के अधिकारी पहले भी जेद्दा में भीख मांगने वाले भारतीय हाजियों की सूचना दे चुके हैं और पकड़े जाने पर अधिकारियों ने उन्हें वापस भारत भेज दिया.

क़िदवई के मुताबिक़ 27-28 अक्तूबर को सऊदी अधिकारियों ने उन्हें कुछ भारतीयों के भीख मांगने की ख़बर दी. उन्होंने इस बारे में और जांच पड़ताल की और फ़ौरन भारतीय विदेश मंत्रालय और राज्य सरकार को सूचित किया .

फ़ैज़ किदवई के मुताबिक़ उसी सूचना के आधार पर 30 अक्टूबर को कोलकता में पुलिस ने शेरफ़ुल नाम के एक व्यक्ति को गिरफ़्तार भी किया था.

जानकारी के मुताबिक़ लापता हाजियों में से ज़्यादातर लोग शारीरिक रूप से विकलांग हैं. जबकि हज पर जानेवालों के लिए शारीरिक फ़िटनेस की कसौटी ज़रूरी होती है, क्योंकि हज के दौरान चिलचिलाती धूप व गर्मी में काफ़ी दूर तक पैदल चलना पड़ता है.

फ़ैज़ क़िदवई के अनुसार किसी भी राज्य से हाजियों का चयन वहां की राज्य हज कमेटी करती है और इससे जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास का कोई लेना- देना नहीं है.

क़िदवई का कहना है कि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय, पश्चिम बंगाल सरकार और पश्चिम बंगाल हज कमेटी को दे दी है और इस पूरे मामले की जांच की अपील की है.

लेकिन आख़िर उन हाजियों का चयन कैसे हुआ और शारीरिक रूप से विकलांग होने के बावजूद उन्हें रोका क्यों नहीं गया ये पूछे जाने पर पश्चिम बंगाल राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष शेख़ नूरुल इस्लाम ने बीबीसी को बताया कि उन्हें उन हजयात्रियों के विकलांग होने की सूचना ऐन मौक़े पर हुई, और उस वक़्त हज पर जाने वालों को रोकना मुश्किल था.

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