रूस: पुतिन के ख़िलाफ़ हज़ारों सड़कों पर

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रूस की राजधानी मॉस्को में हज़ारों की संख्या में लोगों ने चुनावी धांधलियों का विरोध करते हुए अगले साल होने वाले चुनावों में रूसी प्रधानमंत्री व्लादीमीर पुतिन को ‘एक भी मत न दिए जाने का’ प्रण लिया.

रूस के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार विरोधी रैली के बावजूद जनता का बहुमत व्लादीमीर पुतिन के साथ है.

प्रवक्ता दमित्रि पास्कोव ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि इस तरह की रैलियां राजधानियों में आम बात हैं.

रूस के सारे विपक्षी दल चार दिसंबर को हुए चुनावों के दौरान हुई कथित धाँधली के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहें हैं. वलादीवोस्तोक शहर में दिन की पहली रैली में एक सांसद ने मांग की कि चुनाव के नतीजों को रद्द किया जाए.

प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे एलैक्ज़ेई नेवलनी ने भीड़ से एकमत होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लामबंद होने का आह्वान किया. उन्होंने कहा इस भीड़ में मौजूद लोगों की संख्या सरकार को हिलाने के लिए काफ़ी है लेकिन वो शांति का मार्ग अपनाना चाहते हैं और कुछ नहीं करेंगे.

शून्य से भी नीचे के तापमान में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी रैली का हिस्सा बनने के लिए घरों से बाहर निकले. इस तरह की रैलियां पूरे रूस में आयोजित हो रही हैं.

वलादीवोस्तोक शहर में दिन की पहली रैली में एक सांसद ने मांग की थी कि चुनाव के नतीजों को रद्द किया जाए.

रुस के गृहमंत्री के मुताबिक इस रैली में कम से कम 28,000 लोगों ने हिस्सा लिया लेकिन आयोजकों का मानना है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या कम से कम 1,20,000 थी.

'वोटर्स एसोसिएशन' की मांग

रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने पिछले सप्ताह राजनीतिक सुधारों का ऐलान किया था लेकिन काफ़ी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह काफ़ी नहीं है.

वह चुनावों के दोबारा कराए जाने की मांग कर रहें हैं. रूसी प्रधानमंत्री व्लादीमीर पुतिन की पार्टी ने चुनाव जीता था लेकिन पिछली बार के मुक़ाबले उन्हें इस बार काफ़ी कम वोट मिले थे.

कई प्रदर्शनकारियों ने पुतिन के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाए जाने की माँग के पोस्टर उठा रखे थे.

मौके पर मौजूद बीबीसी संवाददाता स्टीव रॉज़ेनबर्ग के मुताबिक पुतिन के खिलाफ़ हवा में लहराते पोस्टरों के अलावा कई लोगों के हाथों में लाल सीटियां भी थीं जो सरकार के के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद करने का प्रतीक थीं.

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण मांग की गई जिसके तहत चुनाव में धांधली पर रोक लगाने के लिए 'मॉस्को वोटर्स एसोसिएशन' बनाए जाने की बात कही गई.

ग़ौरतलब है कि भारी जनविरोध के बावजूद व्लादीमीर पुतिन के अगले साल मार्च में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव जीतने की संभावना है.

आयोजकों का मानना है कि साल 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद से हुई अब तक की सबसे बड़ी 10 दिसंबर की रैली में 50,000 लोग शामिल थे.

इस सफलता ने विपक्ष की काफ़ी उम्मीदे बढ़ाई हैं.

इन रैलियों शामिल हुए 22 प्रवक्ताओं में पुतिन के राष्ट्रपति पद को चुनौती देने वाले मिख़ाइल प्रोखोरोव और पूर्व सोवियत नेता मिख़ाइल गोर्बाचोव भी शामिल हैं.

नेताओं के इलावा कुछ और क्षेत्रों से भी लोग हैं जैसे कि रॉक संगीतकार यूरी शवचुक जो वीडियो लिंक से संबोधन करेंगे, जासूसी कहानियाँ लिखने वाले बोरिस अकूनिन, हेरोइन के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले येवगनी रोएज़मैन और व्यंग्यकार विक्टर शेंडरोविच.

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