अवैध शराब बनाने वालों ने 'रोज़गार' मांगा

देसी शराब
Image caption कोलकाता के पास बसे लेनिनगढ़ में देसी शराब बनाने का सबसे बड़ा ठेका है.

पश्चिम बंगाल में ज़हरीली शराब पीने से 170 से भी ज्य़ादा लोगों की मौत के बाद देसी शराब बनाने वाले लोग अब इस ग़ैरक़ानूनी काम को छोड़ देना चाहते हैं.

इन लोगों की मांग है कि सरकार उनको कुछ वैकल्पिक काम दिला दे. इस तरह की मांग और भी कई जगहों से उठी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा है कि सरकार उनकी मांगों पर काफ़ी गंभीरता से विचार कर रही है.

देसी शराब बनाने का सबसे बड़ा ठेका कोलकाता के पास लेनिनगढ़ में है. यहाँ के हालात को समझने के लिए मैं खुद वहां गया.

लेनिनगढ़ इलाका पूरी तरह से एक रिफ्यूजी कॉलोनी है. काफी देर और दूर तक चलने के बाद मैं एक तालाब के पास पहुंचा, जिसका पानी काफी गंदा था और तालाब के बीचोंबीच बनाई गई थी एक देसी शराब की भट्टी.

इस देसी शराब की भट्टी के किनारे छोटे-छोटे नाव लगे हुए थे, इन नावों के ज़रिए ही लोग इन भट्टियों तक पहुंचते हैं.

स्थानीय निवासी आनंद सरकार मुझे रास्ता दिखाकर यहां तक ले आए. आनंद ने बताया कि इस तालाब में 18 भट्टियाँ हैं और एक भट्टी में 15 से 20 लोग काम करते हैं जिन्हें रोज़ाना के 150 से 200 रुपये मज़दूरी मिलती है.

आसपास के लोगों के विरोध के कारण ये भट्टियां दिन में ना जलाकार सिर्फ रात में जलाई जाती हैं.

कमाई के लिए ग़ैरकानूनी काम

जब हम तालाब के पास खड़े थे तभी हमें इन भट्टियों में काम करने वाले कुछ लोग मिले, जिनका कहना था कि दूसरी जगहों पर काम करने पर इन्हें काफ़ी कम मज़दूरी मिलती है इसलिए इन्हें मजबूरी में ये ग़ैरक़ानूनी काम करना पड़ता है.

चोलाई यानि देसी शराब की भट्टियों में काम करने वाले सभी लोगों की कमोबेश ऐसी ही राय थी कि वे इस धंधे में कुछ ज़्यादा कमाई के लिए आए थे.

यहां काम करने वालों में बहुत सारी महिलाएं भी शामिल हैं जिनमें से ज्य़ादातर निरक्षर हैं लेकिन वो अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती हैं.अपने बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फीस जुटाने के लिए उन्हें ये ग़ैरकानूनी काम शुरु करना पड़ा.

चौबीस परगना ज़िले के दक्षिणी इलाके में ज़हरीली शराब से हुई 170 लोगों की मौत के बाद पुलिस ने लेनिनगढ़ की सभी अवैध भट्टियों को तोड़ दिया है,जिससे इलाके के लोग बेरोज़गार हो गए हैं.

इससे इन लोगों की ज़िंदगी काफी प्रभावित हुई है. इनका कहना है, "पुलिस का दबाव काफी बढ़ गया है, सारी भट्टियां जला दी गईं है जिससे गुज़ारा करना मुश्किल हो गया है".

ये कहते हैं,''स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की परिक्षाएं खत्म हो गईं है, नए सत्र में इनका दाख़िला कराना है, किताबें खरीदनी है ये सबकुछ उधार के सहारे कब तक चलेगा''?

देसी शराब यानि चोलाई बनाने वाले मज़दूरों का कहना है कि वो ये ग़ैरक़ानूनी काम छोड़ना चाहते हैं.

इनका कहना है, ''हम ये काम नहीं करना चाहते. इससे हमें ना सिर्फ नीची नज़र से देखा जाता है बल्कि हर समय पुलिस का डर भी बना रहता है,ऐसे में सरकार भले ही हमें सफाईकर्मी का काम दे दे लेकिन इस धंधे से हमें छुटकारा दिलाए''.

मांग पर विचार

इस तरह की मांग चोलाई बनाने वाले हर इलाके से उठी है, जिसपर मुख्यमंत्री ने विचार करने की घोषणा की है.

Image caption लेनिनगढ़ की इन अवैध शराब भट्टियों में महिलाएं भी काम करती हैं

ममता बनर्जी ने कहा है, ''जो लोग इस तरह के काम से जुड़े हैं उनके लिए एक योजना बनाई जा रही है ताकि वे लोग दूसरा काम शुरू कर सकें''.

इससे पहले भी वाममोर्चा के शासन के दौरान आबकारी मंत्री असीम दासगुप्ता ने ऐलान किया था कि लेनिनगढ़ इलाके में सरकारी शराब की फैक्ट्री बनाई जाएगी जहां ग़ैरकानूनी भट्टियों में काम करने वाले मज़दूरों को वैकल्पिक काम मिल सकेगा.

पर आश्वासन के बाद उस दिशा में कुछ काम नहीं हुआ.

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