अन्ना हज़ारे आत्मनिरीक्षण करें: बाल ठाकरे

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Image caption मुंबई में अन्ना हज़ारे के आंदोलन की असफलता पर बाल ठाकरे ने अन्ना को आत्मनिरीक्षण करने को कहा

शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा है कि गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हज़ारे को इस बात का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि मज़बूत लोकपाल बिल के लिए मुंबई के एमएमआरडीए मैदान में किए गए उनके अनशन को दूसरे दिन ही क्यों ख़त्म करना पड़ा.

शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे अपने संपादकीय में बाल ठाकरे ने कहा, ''कल तक जो मीडिया अन्ना हज़ारे के समर्थन में खड़ी थी, वो भी आज उनका विरोध कर रही है. प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों ही अब इस तरह के सनसनीखेज़ ख़बरें देने में लगी हैं कि आख़िर ये आंदोलन क्यों असफल रहा?"

बाल ठाकरे के अनुसार जब संसद में लोकपाल बिल पर चर्चा चल रही थी, तब अन्ना हज़ारे को अनशन पर नहीं बैठना चाहिए था.

सहनशीलता और धैर्य की ज़रुरत

बाल ठाकरे ने आगे कहा, ''जो लोग सामाजिक आंदोलनों की अगुआई करते हैं, उन्हें काफ़ी सहनशील होना चाहिए और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना चाहिए.''

ठाकरे ने संपादकीय में लिखा है, ''जो लोग इस तरह के आंदोलनों की अगुआई करते हैं, उन्हें ना सिर्फ लोगों को संगठित कर उन्हें प्रेरित कर चाहिए बल्कि एक सोची समझी रणनीति के तहत उन्हें आंदोलन के लिए तैयार भी करना चाहिए.''

बाल ठाकरे ने अन्ना हज़ारे और उनकी टीम के सदस्यों को आगाह किया और कहा,''इस बात का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है कि इस आंदोलन के दौरान जो कमियां रहीं, जो अस्थिरता और गड़बड़ियां हुईं, उनका फ़ायदा देश के दुश्मन ना उठा लें.''

बाल ठाकरे के अनुसार लोग ये समझ चुके हैं कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीति और वाकयुद्ध हो रहा है, लेकिन जिस तरह टीम अन्ना भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बार-बार अन्ना को अनशन पर बिठाने की धमकी देते हुए जनप्रतिनिधियों को चुनौती दे रही थी, उसे लोगों ने पसंद नहीं किया.

ठाकरे ने कहा कि मुंबई में जंतर-मंतर और रामलीला मैदान का ड्रामा इसलिए नहीं चल सका क्योंकि महाराष्ट्र के लोग इस तरह के नाटक पसंद नहीं करते.

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