इतिहास के पन्नों में एक जनवरी

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि एक जनवरी को केवल नए साल के जश्न ही दर्ज नहीं किए गए. 1978 में इसी दिन एयर इंडिया का एक यात्री विमान 213 यात्रियों के साथ बंबई में नज़दीक समुद्र में जा गिरा. इसी दिन 1959 में फिदेल कास्त्रो और उनके सहयोगियों ने क्यूबा में तख्ता पलट कर देश पर वामपंथी सरकार को स्थापित कर दिया था.

1978 : एयर इंडिया हादसा 213 की मौत

Image caption दुर्घटनाग्रस्त होने वाले इस जहाज़ का नाम सम्राट अशोक था

एयर इंडिया के एक विशालकाय बोइंग जहाज़ 747 जहाज़ ने शाम के धुंधलके में बंबई के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दुबई के लिए उड़ान भरी और चंद ही मिनटों में समुद्र में गिर गया. जहाज़ पर सवार सभी 213 लोग इस हादसे में मारे गए.

शुरुआत में इस हादसे के पीछे किसी साज़िश के कयास लगाये गए लेकिन बाद में समुद्र से निकाले गए मलबे के बाद यह बात गलत साबित हुई.

जहाज़ के मलबे को देख कर पता चला कि यह जहाज़ किसी किस्म का धमाके या बाहरी हमले का शिकार नहीं हुआ.

लंबी तहकीकात के बाद पता लगा कि विमान में किसी किस्म की यांत्रिक खराबी आ गई थी जिसकी वजह से यह हादसा हुआ.

हवाई अड्डे से उड़ान भरने के महज़ 101 सेकण्ड के भीतर ही यह दुर्घटना घट गई. इस जहाज़ पर मारे जाने वाले 213 लोगों में से 190 यात्री थे और 23 विमानकर्मी.

1959 : फ़िदेल कास्त्रो के नेतृत्व में वामपंथियों का क्यूबा पर कब्ज़ा

Image caption तख्तापलट के समय फ़िदेल कास्त्रों की उम्र महज़ 32 साल थी

आज ही के दिन साल 1959 में क्यूबा के राष्ट्रपति फ्लुजेंसियो बतिस्ता को 32 साल के फ़िदेल कास्त्रो और उनके लगातार बढ़ते आ रहे साथियों के कारण देश छोड़ कर भागने को मजबूर होना पड़ा था.

बतिस्ता के देश के भाग जाने की ख़ुशी में हज़ारों हज़ारों क्यूबा के निवासी झूमते हुए सड़कों पर आ गए.

उत्सव सा माहौल बन गया. देश की जेलों के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई जहाँ अदालत के आदेश के बाद बंद राजनीतिक बंदियों को छोड़ा जाना शुरू हो गया.

हालांकि कास्त्रो ने सत्ता की बाग़डोर अपने हाथ में तुरंत ही ले ली, लेकिन उन्होंने जुलाई में ही देश के राष्ट्रपति का पद संभाला.

राष्ट्रपति बनने के साथ ही उन्होंने देश में मौजूद तमाम अमरीकी चीनी बनाने के कारखानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया. फ़िदेल के सत्ता सँभालने के बाद से ही क्यूबा में एक दलीय शासन की स्थापना हो गई.

कास्त्रो के शुरुआती क़दमों के कारण अमरीका और क्यूबा के बीच ऐसी दुश्मनी हुई जो आज तक ख़त्म नहीं हुई है.

साल 1962 में कास्त्रो ने एक तरह से दुनिया को परमाणु युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया था जब उन्होंने अपने देश की ज़मीन पर सोवियत संघ की परमाणु मिसायलों को लगाने की अनुमति दे डाली.

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