उमर अब्दुल्ला का काफ़िला रोकने की कोशिश

 मंगलवार, 3 जनवरी, 2012 को 19:09 IST तक के समाचार
उमर अब्दुल्ला (फ़ाइल फोटो)

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मृतक छात्र के परिवार से मिलने गये थे

उड़ी में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के काफ़िले को रोकने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने मंगलवार को बल प्रयोग किया जहाँ नेशनल हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन यानी एनएचपीसी के सुरक्षाकर्मियों की गोलियों से एक छात्र मारा गया था और चार अन्य ज़ख़्मी हो गए थे.

कश्मीर से 75 किलोमीटर दूर बारामुला ज़िले के उड़ी कस्बे में प्रदर्शनकारियों पर एनएचपीसी के सुरक्षाकर्मियों ने सोमवार की सुबह गोलियाँ चलाई थीं.

यह क़स्बा भारत और पाकिस्तान को विभाजित करने वाली नियंत्रण रेखा के क़रीब बसा है जिसकी वजह से यहां बड़े पैमाने पर सेना की तैनाती है.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मृतक छात्र के परिजनों से मिलने गए थे, लेकिन जब वह श्रीनगर लौट रहे थे, तब ग़ुस्साए प्रदर्शनकारियों ने उनका क़ाफ़िला रोक दिया.

एक आधिकारिक प्रवक्ता के मुताबिक़, ''मुख्यमंत्री ने मृतक छात्र के परिवार को नक़द 25,000 रुपये राहत राशि के तौर पर दिए हैं.''

उड़ी में संक्षिप्त शोक-सभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जो कुछ कहा, उसके हवाले से एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ''हम केंद्रीय गृह मंत्री को अपना विरोध पहले ही जता चुके हैं क्योंकि वे सुरक्षाकर्मी हमारे बलों का हिस्सा नहीं हैं, हमने उन्हें गिरफ़्तार भी किया है.''

बिजली की भारी क़िल्लत

विरोध

"हम केंद्रीय गृह मंत्री को अपना विरोध पहले ही जता चुके हैं क्योंकि वे सुरक्षाकर्मी हमारे बलों का हिस्सा नहीं हैं, हमने उन्हें गिरफ़्तार भी किया है"

उमर अब्दुल्ला

एक छात्र की मौत से कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में तनाव पैदा हो गया है जो बिजली की लगातार कटौती से बुरी तरह प्रभावित हैं.

कम से कम 700 मेगावॉट बिजली की कमी को पूरा करने के लिए बीते साल दिसंबर में अधिकारियों ने लोड-शेडिंग की घोषणा की थी.

बिजली की आपूर्ति में लगातार कटौती की वजह से स्थानीय लोगों में ज़बरदस्त आक्रोश है. कई क़स्बों और गांवों में लोग विरोध-प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए हैं.

कारोबारी संगठनों ने एनएचपीसी की कई बिजली परियोजनाओं की बहाली की मांग की है.

एनएचपीसी भारत सरकार का एक उपक्रम है जिसकी कुल परिसम्पत्ति लगभग डेढ़ खरब रुपए है. एनएचपीसी दस से ज़्यादा बिजली परियोजनाओं को संचालित करता है जिनकी स्थापित क्षमता 2000 मेगावॉट से ज़्यादा है.

एक प्रमुख कारोबारी निकाय के अध्यक्ष शकील कलंदर का कहना है, ''जम्मू-कश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता 20,000 मेगावॉट है लेकिन हम इससे दस प्रतिशत कम बिजली पैदा कर रहे हैं और यह उत्पादन एनएचपीसी के ज़रिए हो रहा है. सरकार को उन परियोजनाओं को दोबारा शुरू करना चाहिए ताकि राज्य में बिजली का उत्पादन मांग के अनुरूप हो.''

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