ईरान: तेल प्रतिबंध पर यूरोपीय संघ में सहमति

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Image caption यूरोपीय देश लगभग 4,50,000 बैरल प्रति दिन के हिसाब से ईरान से तेल ख़रीदते हैं

ईरान से तेल आयात करने पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूरोपीय संघ के देशों के बीच सैद्धांतिक तौर पर सहमति बन गई है.

इसका उद्देश्य ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए दबाव डालना है.

आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा जनवरी महीने के अंत में होने वाली यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में की जाएगी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यूरोपीय देश लगभग 4,50,000 बैरल प्रति दिन के हिसाब से ईरान से तेल ख़रीददते हैं. यानि चीन के बाद युरोपीय संघ ईरान से तेल ख़रीदने वाला सबसे बड़ा समूह है.

हालांकि ईरान ने इन प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन प्रतिबंधो को बावजूद उसके पास ग्राहकों की कमी नहीं होगी.

ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों की धमकियों को ख़ारिज करता रहा है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

ईरान ने इस बात से भी इनकार किया है कि उसकी मुद्रा की गिरती क़ीमतों का कारण अमरीका के ज़रिए उसके बैंकों पर लगाए गए प्रतिबंध है.

इस बीच अमरीका ने ईयू के इस क़दम का स्वागत किया है. अमरीका ने हाल ही में ईरान पर कई और प्रतिबंधों की घोषणा की है.

यूरोपीय संघ के इस फ़ैसले के फ़ौरन बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में इज़ाफ़ा हो गया.

फ़्रांस के विदेश मंत्री एलन जूप्पे ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, ''यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक 30 जनवरी

को होने वाली है और मुझे आशा है कि उस मौक़े पर हम ईरान से तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के बारे में कोई फ़ैसला कर लेगें.''

उन्होंने ये भी कहा कि ईरान से तेल ख़रीदने वाले यूरोपीय देशों को यक़ीन दिलाना होगा कि हम उन्हें कोई वैकल्पिक रास्ता ज़रूर सुझाएंगे.

कड़े प्रतिबंध की मांग

मंगलवार को फ़्रांस ने ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.

इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमरीकी विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने कहा, ''हमलोग देखना चाहेंगे कि इस तरह के क़दम सिर्फ़ यूरोप में हमारे क़रीबी सहयोगी ही नहीं बल्कि दुनिया भर के देश इस तरह के क़दम उठाएं.''

बीबीसी संवाददाता जेम्स रिनॉल्ड्स का कहना है कि ईरान कच्चे तेल के निर्यात से अपनी आधी कमाई करता है.

अगर यूरोप के देश उसके तेल को नहीं ख़रीदेंगे तो उसे एशिया के देशों की तरफ़ देखना होगा.

इस समय ईरान के कुल तेल निर्यात का 17 फ़ीसदी यूरोपीय देशों को जाता है.

अमरीका ने तो एक लंबे समय से ईरान के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगा रखा है और उन दोनों के बीच कोई व्यापार नही होता है.

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