नेताओं को अदालत की अवमानना का नोटिस

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Image caption अदालत ने जिन लोगों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़िरदौस आशिफ़ आवाण भी शामिल हैं

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के फ़ैसले की आलोचना करने के आरोप में दो केंद्रीय मंत्रियों सहित सत्ताधारी दल के पाँच वरिष्ठ नेताओं को अदालत की अवमानना के नोटिस जारी किए हैं.

इन पाँच लोगों ने बीते साल पहली दिसंबर को अमरीकी अधिकारियों को कथित तौर पर भेजे गए गुप्त संदेश से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की कड़ी आलोचना की थी.

अदालत ने जिन लोगों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़िरदौस आशिफ़ आवाण, धार्मिक मामलों के केंद्रीय मंत्री सैयद ख़ुर्शीद शाह, पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ सांसद बाबर आवाण, पार्टी के सूचना सचिव क़मर ज़मान क़ायरा और प्रधानमंत्री के सलाहकार फ़ारुक़ आवाण शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यों वाली एक खंडपीठ ने इन लोगों को 13 जनवरी पर जवाब देने के लिए कहा है.

'सरकार ने ध्यान क्यों नहीं दिया'

अदालत ने अटॉर्नी जनरल मौलवी अनवारुल हक़ से पूछा कि बीते साल पहली दिसंबर को एक पत्रकार वार्ता में अदालती फ़ैसले की खिल्ली उड़ाई गई, लेकिन सरकार ने इस ओर कोई ध्यान क्यों नहीं दिया.

जस्टिस ऐजाज़ अफ़ज़ल चौधरी ने कहा कि उस पत्रकार वार्ता में बहुत से ऐसे पहलू निकलते हैं, जिनसे अदालती फ़ैसलों की अवमानना होती है.

अटॉर्नी जनरल ने उस पत्रकार वार्ता के हवाले से प्रधानमंत्री का जवाब भी अदालत में पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया था कि उस प्रेस वार्ता में इतिहास का उल्लेख किया गया था और नेताओं का उद्देश्य अदालती फ़ैसलों का मज़ाक़ उड़ाना नहीं था.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल पहली दिसंबर को अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ की ओर से दायर याचिका पर ये आदेश दिया था.

हुसैन हक़्क़ानी पर आरोप लगे थे कि उन्होंने वरिष्ठ अमरीकी सैनिक अधिकारी एडमिरल माइक मलेन को एक गुप्त संदेश लिखकर पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमरीका से 'मदद की गुहार' लगाई थी.

विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने अदालत में याचिका दायर कर इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

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